इलेक्ट्रॉन का सिद्धान्त किसे कहते है ELECTRON THEORY
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इलेक्ट्रॉन का सिद्धान्त किसे कहते है? | विशेषताएं

नमस्कार दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको सिखने वाले है की इलेक्ट्रॉन का सिद्धान्त (electron theory) किसे कहते है। और मुक्त इलेक्ट्रॉन ( FREE ELECTRON ) क्या होता है तो अगर आप जानना चाहते है तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें।

आवेश-वाहकों की परिकल्पना का आधुनिक रूप इलेक्ट्रॉन का सिद्धान्त (electron theory) है । इस सिद्धान्त के अनुसार सभी पदार्थ अणुओं से मिलकर बने होते हैं तथा अणुओं को परमाणुओं में विभाजित किया जा सकता है। प्रत्येक परमाणु में एक बीच का भारी भाग होता है जिसे ‘नाभिक‘ ( Nucleus ) कहते हैं।

परमाणु में इलेक्ट्रॉनों के संख्या नाभिक के प्रोटॉनों की संख्या के बराबर (The number of electrons is equal to the number of protons in the nucleus) होती हैं अतः परमाणु में धनावेश तथा ऋणावेश की मात्राएं बराबर होती है। इस प्रकार परमाणु विद्युत उदासीन (nuclear power neutral) होता है । में जब किसी परमाणु से किसी प्रकार एक अथवा अधिक इलेक्ट्रॉन निकाल देते हैं तो वह परमाणु धनावेशित हो जाता है । इसके विपरीत यदि किसी परमाणु को एक अथवा अधिक इलेक्ट्रॉन दे दें तो वह परमाणु ऋणावेशित (nuclear debt charged) हो जाता है । इस प्रकार , किसी वस्तु का धनावेशित हो जाना उसके परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की कमी प्रदर्शित करता है तथा वस्तु का ऋणावेशित होता उसके परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की अधिकता प्रदर्शित करता है ।

इलेक्ट्रॉन का आवेश क्या होता है?

प्रोटॉन (परमाणु के नाभिक के अंदर) और इलेक्ट्रॉनों (जो हॉल बनाते हैं) में विद्युत आवेश (electrical charge) होता है। दोनों ही मामलों में यह समान है, इस अंतर के साथ कि प्रोटॉन का आवेश धनात्मक और इलेक्ट्रॉनों का ऋणात्मक होता है।

इलेक्ट्रॉन किसे कहते है?

इलेक्ट्रॉन छोटे कण होते हैं जो परमाणु नाभिक के चारों ओर घूमते हैं। हम ब्रह्मांड में एक बहुत बड़ा, समान उदाहरण पाते हैं: सूर्य के चारों ओर घूमने वाले ग्रह। ऊर्जा के कई रूप हैं। आपका शरीर भोजन से ऊर्जा लेता है और इसे गर्मी और गति में बदल देता है।

यह ‘ प्रोटॉन ‘ तथा ‘ न्यूट्रॉन ‘ नामक कणों से मिलकर बना होता है । प्रोटॉन पर धनावेश होता है , जबकि न्यूट्रॉन आवेश – हीन होता है। इस प्रकार नाभिक धनावेशित होता है । नाभिक के चारों ओर एक तीसरे प्रकार के कण भिन्न – भिन्न कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं। इन कणों को इलेक्ट्रॉन कहते हैं। इलेक्ट्रॉन पर प्रोटॉन के धनावेश के बराबर ऋणावेश उपस्थित होता है।

इलेक्ट्रॉन एक ऋणावेशित कण ( Particle ) है। जिसका द्रव्यमान लगभग नगण्य होता है। इलेक्ट्रॉन के कुछ महत्त्वपूर्ण गुणधर्म निम्न है )

  • इलेक्ट्रॉन पर आवेश , e = 1.602×10-19 कूलॉम
  • इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान , m = 9.0 x 10 kg
  • इलेक्ट्रॉन की त्रिज्या , r = 1.9 x 10-15 मीटर

इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन की विशेषताएं क्या हैं?

एक इलेक्ट्रॉन एक प्रकार का उप-परमाणु कण होता है जिसमें एक नकारात्मक विद्युत आवेश होता है और सक्रिय रूप से परमाणु नाभिक (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन से बना) की परिक्रमा करता है, जिसमें एक सकारात्मक विद्युत आवेश होता है।

प्रोटॉन का धनात्मक आवेश होता है। इलेक्ट्रॉनों का ऋणात्मक आवेश होता है। प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन का आवेश बिल्कुल समान आकार का होता है, लेकिन विपरीत होता है। न्यूट्रॉन का कोई चार्ज नहीं होता है।

परमाणु की बनावट के अनुसार इसके नाभिक में प्रोटॉनों पर ( + ve ) आवेश तथा बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर बराबर ( -ve ) आवेश के आकर्षण बल के साथ जुड़ा होता है । यह आकर्षण बल नाभिक के पास अधिक होता है व दूर जाने पर कम होता है । जिन पदार्थों के परमाणुओं के बाहरी पथों में केवल एक ही इलेक्ट्रॉन होता है वे इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर कम आकर्षण रखते हैं । वे स्वतन्त्र होते हैं यदि इन पर विशेष बल लगाया जाए तो ये प्रवाहित हो सकते हैं । इस प्रकार लगाया गया बल विद्युत ऊर्जा में बदल जाता है । स्वतंत्र इलेक्ट्रॉनों में रिक्त स्थान होता है , जिसमें इस ऊर्जा को स्थानान्तरित किया जा सकता है । इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह को ही विद्युत धारा कहते हैं । विद्युत धारा की इकाई एम्पियर है।

मुक्त इलेक्ट्रॉन ( FREE ELECTRON )

किसी पदार्थ के परमाणु में जो इलेक्ट्रॉन नामिक के समीप की कक्षाओं में होते हैं, वे नाभिक के धनावेश के द्वारा प्रबल आकर्षण बल से बंधे रहते हैं। परन्तु नाभिक से दूर वाली कक्षाओं के इलेक्ट्रॉनों पर यह बल बहुत कम होता है । अतः इन इलेक्ट्रॉनों को इनके स्थान से आसानी से हटाया जा सकता है ।

इनमें से अनेक इलेक्ट्रॉन अपने परमाणुओं से अलग र पूरे पदार्थ में स्वतंत्रतापूर्वक विचरण करते रहते हैं । इन्हें मुक्त न ( Free Electron ) कहते हैं। ये इलेक्ट्रॉन ही आवेश को पदार्थ में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं । अतः किसी ठोस पदार्थ की विद्युत चालकता उसमें मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है।

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