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Category: Electrician course

बैट्री चार्जर क्या ओर कैसा होता है? | बैटरी चार्जर कैसे बनाए?

बैटरी चार्जर एक ऐसा उपकरण होता है जो किसी बैटरी में स्थित रासायनिक पदार्थ में इलेक्ट्रॉन की मात्रा को बढ़ा देता है अर्थात इलेक्ट्रॉन जमा कर देता है जिसकी वजह से हमारी बैटरी चार्ज हो जाती है

सेल एवं बैटरी क्या होता है? | संरचना | प्रकार

इसके बाद बैट्री का ही अन्य रूप विद्युत सैल अस्तित्व में आया जिसे बैट्री के कॉन्सेप्ट ( Concept ) को उपयोग करके बनाया गया। इसे बैट्री का लघु रूप कहा जा सकता है।

चालक, कुचालक व अर्द्धचालक में अंतर

कंडक्टर इलेक्ट्रॉनों के मुक्त संचलन के माध्यम से चार्ज ट्रांसफर की अनुमति देते हैं। कंडक्टरों के विपरीत, इंसुलेटर ऐसे पदार्थ होते हैं जो परमाणु से परमाणु और अणु से अणु तक इलेक्ट्रॉनों के मुक्त प्रवाह को बाधित करते हैं।

अर्द्धचालक किसे कहते है? | विशेषताएं | प्रकार | उपयोग | अर्द्धचालक पदार्थ

अर्द्धचालक वे पदार्थ होते हैं जिनकी प्रतिरोधकता , चालक एवं कुचालक के मध्य होती है। ये मिश्र धातु ( एलॉय ) होते हैं। ये धारा के बहाव में बहुत अधिक प्रतिरोध उत्पन्न करते हैं। ये स्टैण्डर्ड प्रतिरोध बनाने में बहुत उपयोगी होते हैं।

कुचालक किसे कहते हैं? | प्रकार | विशेषताएं | उपयोगी | प्रश्न व उत्तर

ऐसे पदार्थ, जिनमें हम बिजली को लेकर नहीं जा सकते हैं, उनको कुचालक पदार्थ कहते हैं। इनमें करंट इसलिए प्रवाहित नहीं होता है क्योंकि इनकी प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक व चालकता न के बराबर होती है।

विद्युतीय पदार्थ किसे कहते है?

विद्युत इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रयोग किए जाने वाले पदार्थों को विद्युतीय पदार्थ कहते हैं। इस प्रकार के पदार्थ प्रायः विद्युत चालन अथवा विद्युत रोधन के लिए प्रयोग किए जाते हैं।

तार क्या है? | धारा वहन क्षमता | तार की विशिष्टताएं

विद्युत धारा के निरन्तर प्रवाह के लिए मार्ग प्रस्तुत करने वाल गोलाकार क्रॉस सेक्शन वाला बिना आवरण का चालक अथवा आवरण युक् ‘ इन्सुलेटेड ‘ चालक , तार कहलाता है

चालक किसे कहते है? | गुण | प्रकार | विशेषताएं | अभिलाक्षणिकताएं

वे पदार्थ जो अपने अन्दर से इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह सुगमता से होने देते हैं या ऐसे पदार्थ जो इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह में बाधा नहीं डालते , विद्युत के अच्छे चालक कहलाते हैं।

विद्युत धारा के प्रभाव ( EFFECTS OF ELECTRIC CURRENT )

विद्युत ऊर्जा का ऊष्मा ऊर्जा में यह परिवर्तन इलेक्ट्रॉनों के चालक में प्रवाह के समय अणुओं के टकराने से होता है। इस प्रभाव के कारण मोटरों का गर्म होना व इसका प्रयोग हीटर, विद्युत प्रेस, गीजर, थर्मल रिले, विद्युतीय भट्टियों में देखने को मिलता है।

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