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चालक किसे कहते है? | गुण | प्रकार | विशेषताएं | अभिलाक्षणिकताएं

वे पदार्थ जो अपने अन्दर से इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह सुगमता से होने देते हैं या ऐसे पदार्थ जो इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह (flow of electrons) में बाधा नहीं डालते , विद्युत के अच्छे चालक (good conductor of electricity) कहलाते हैं।

इनमें निम्न गुण होते हैं-

  1. चालकों का प्रतिरोध बहुत कम होता है।
  2. इनकी चालकता बहुत अधिक होती है।
  3. इनकी प्रतिरोधकता 10-12 ओह्म सेन्टीमीटर (ohm centimeter) के क्षेत्र में होती है।

इस प्रकार के पदार्थों में चालन बैण्ड तथा संयोजी बैण्ड एक दूसरे को ओवरलैप कर लेते हैं जिससे इनमें कोई वर्जित ऊर्जा (forbidden energy) अन्तराल नहीं होता है। इसके कारण इलेक्ट्रॉन आसानी से संयोजी बैण्ड (connective band) में से चालन बैण्ड (conduction band) में जा सकते हैं। अतः पदार्थ में आवेश वाहक ( Charge Carrier ) अधिक संख्या में होते हैं इसलिए इसकी चालकता (conductivity) अधिक होती है।

वे इलैक्ट्रॉनिक सिद्धान्त (electronic principle) ( मॉडर्न थ्योरी ) के अनुसार वे पदार्थ जिनके परमाणुओं के बाहरी पथ में स्वतन्त्र इलेक्ट्रॉन होते हैं , विद्युत के अच्छे चालक कहलाते हैं।

चालक किसे कहते है  गुण  प्रकार  विशेषताएं  अभिलाक्षणिकताएं
चालक किसे कहते है गुण प्रकार विशेषताएं अभिलाक्षणिकताएं

अच्छे चालक की विशेषताएं ( Properties of a Good Conductor )

  1. चालक की प्रतिरोधकता बहुत कम एवं चालकता बहुत अधिक होनी चाहिए।
  2. चालक ऐसे हों कि इनके जोड़ों की सोल्डरिंग आसानी से की जा सके।
  3. चालक पदार्थ तार खींचने योग्य एवं चदरें बनाने योग्य होने चाहिए।
  4. इनकी खिंचाव क्षमता अच्छी होनी चाहिए।
  5. चालक पदार्थ नरम होने चाहिए।

चालक पदार्थों की अभिलाक्षणिकताएं

चालक पदार्थों की अभिलाक्षणिकताओं को सारणी 4.1 द्वारा समझा जा सकता है।

क्रम संख्या गुण तांबा (Cu)एल्यूमिनियम (Al)
1.रंग लाल-भूरा श्वेत
2.विद्युत चालकता (Ʊ/m)5636
3.20 पर प्रतिरोधकता (Ω-m) 0.01786 0.6278
4.गलनांक 1083C660C
5.घनत्व ( kg / cm3 )8.93 2.7
6.20 C पर प्रतिरोध ताप गुणांक 0.003930.00403
7.20 C पर लंब प्रसार गुणांक 17×10-623×10-6
8.तन्य दृढ़ता ( NW / mm2 )22070
सारणी 4.1 चालक पदार्थों की अभिलाक्षणिकताएं

चालकों के प्रकार ( Types of Conductors )

विभिन्न प्रकार के चालकों का विवरण निम्न प्रकार है-

1) सोना ( Gold )

विद्युत का सबसे उत्तम चालक सोना है। इसकी चालकता 99 % होती है। यह कीमती धातु होने के कारण प्रयोग में नहीं लिया जाता है।

2) चांदी ( Silver )

  1. यह विद्युत का बहुत अच्छा चालक होता है।
  2. इसका विशिष्ट प्रतिरोध बहुत कम होता है। 20 ° C पर 1.64 माइक्रो ओहा- सेमी ( 1.64Ωµ-cm ) होता है।
  3. महंगी होने के कारण इसका विद्युतीय कार्यों में प्रयोग सीमित है।
  4. इसका प्रयोग विद्युत यंत्र , अधिक रेटिंग की धारा के कॉन्टेक्ट्स वाले स्टार्टरों में कॉन्टेक्ट प्वॉइन्ट बनाने में होता है।
  5. इसकी चालकता 98 % होती है ।

3) तांबा ( Copper )

  1. चांदी के बाद यह विद्युत का बहुत अच्छा चालक है।
  2. इसकी चालकता 90 % होती है।
  3. शुद्ध तांबे का विशिष्ट प्रतिरोध 1.7µΩ-cm होता है।
  4. तांबा नरम धातु है। इसकी तारें एवं चद्दरें आसानी से बनाई जा सकती हैं।
  5. कम कीमत ( चांदी से ) होने के कारण इसका अत्यधिक उपयोग – तारों में केबलों में ओवरहैड लाइनों में वाइन्डिंग तार , अर्थ इलेक्ट्रॉड स्टार्टरों के कॉन्टेक्ट प्वॉइन्ट , बस – बार आदि में किया जाता है।

तांबे के चालक दो प्रकार के होते हैं-

हार्ड ड्रॉन तांबा ( Hard Drawn Copper )

हार्ड ड्रॉन तांबे के चालक ठण्डी अवस्था में डाइ के साथ खिंचाई करके बनाए जाते हैं। इस प्रकार के तांबे का प्रयोग ओवर हैड लाइन अर्थ इलेक्ट्रॉड कम्युटेटर सेगमेन्ट आदि बनाने में किया जाता है।

एनील्ड ( नरम ) तांबा ( Annealed Copper )

हार्ड ड्रॉन तांबा चालक को नरम करने के लिए गर्म करने के पश्चात् इसे ठण्डा किया जाता है जिससे यह नरम हो जाता है तथा पानी से ठण्डा करने पर बहुत एनील्ड ( नरम ) हो जाता है। नरम हुए तार को आसानी से इधर – उधर मोड़ा जा सकता है। इससे तारें ( केबलें ) बनाने में बहुत आसानी रहती है। ये चालक गोलाई में 6 SWG से 50 SWG तक बनाए जाते हैं। इनका प्रयोग बाइन्डिंग तारों में अधिक मात्रा में किया जाता है। अर्थिंग तार इसी से बनाए जाते हैं। तांबे का उपयोग विद्युत कार्यों में सबसे प्रमुख धातु के रूप में होता है।

4) एल्युमिनियम ( Aluminium )

तांबे के पश्चात् एल्युमिनियम प्रमुख रूप से चालक के रूप में विद्युत के कार्यों में प्रयोग किया जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्न है-

  1. इसकी चालकता 60 % होती है।
  2. यह वजन में हल्का होता है।
  3. 20 ° C पर इसका विशिष्ट प्रतिरोध 2.69×10-2µΩ-cm होता है।
  4. ओवरहैड लाइनों में इसका अत्यधिक उपयोग होता है।
  5. इसको मजबूत बनाने के लिए चालकों के बीच एक स्टील की तार लगाई जाती है, इसे ACSR चालक कहते हैं। ACSR का पूरा नामएल्युमिनियम कन्डक्टर स्टील रेनफ़ौरड” होता है।

वर्तमान में ट्यूब चौक , मोटर , ट्रांसफॉर्मर की बाइन्डिंग में एल्गुनिनियम के तारों द्वारा वाइडिंग की जाती है।

5) पीतल ( Brass )

यह एक मिश्र धातु है। इसमें तांबे एवं जिंक का मिश्रण होता है। यह विद्युत का चालक है। इसकी चालकता चांदी की तुलना में 48% होती है। यान्त्रिक शक्ति अधिक होने के कारण इसका प्रयोग टर्मिनलो स्विच , होल्डर के स्क्रू , नट , बोल्ट आदि बनाने में किया जाता है।

6) लोहा ( Iron )

समान लम्बाई व क्षेत्रफल के तांबे के चालक की तुलना में इसका प्रतिरोध 8 गुना कम होता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्न है-

  1. चुम्बकीय रेखाओं के गुजरने के लिए लोहा सुगम रास्ता बनाता है।
  2. इसकी तारें एवं चदरें आसानी से बनाई जा सकती हैं।
  3. इसका उपयोग मशीनों की बॉडी कवर , शाफ्ट आदि बनाने में किया जाता है। इससे मेन स्विच कवर , कन्ड्यूट तथा G-I पाइप बनाए जाते हैं।
  4. इसकी यान्त्रिक शक्ति बहुत अधिक होती है। ये सस्ते होते हैं एवं इनकी उपलब्धता अच्छी होने के कारण विद्युत कार्यों में अधिक उपयोग में आते है।

7) GI तार ( GI Wire )

GI का पूरा नाम गैल्वेनाइज्ड आयरन होता है। इस पर जंग नहीं लगती है। लोहे के ऊपर गैल्वेनाइजेशन करके जस्ते की परत चढ़ा दी जाती है।

GI तार का मुख्य उपयोग अर्थिंग तार , स्टे तार , टेलीफोन तार व केबलों की यांत्रिक सुदृढता बढ़ाने हेतु GI पत्तियों का आवरण बनाने में किया जाता है।

8) टिन ( Tin )

इस प्रकार के चालक पर जंग नहीं लगता है। इसका गलनाक कम होने के कारण ये शीघ्र पिघल जाता है। इसका उपयोग निम्न प्रकार से किया जाता है-

  1. तांबे की तारों की टिनिंग करने में
  2. सोल्डर बनाने में
  3. फ्यूज तार बनाने में

9) सीसा ( Lead )

इसका गलनांक टिन से अधिक होता है। इस पर रासायनिक पदार्थों का असर कम होता है। इसका प्रयोग केबलों में किया जाता है। सोल्डर बनाने में इसका प्रयोग किया जाता है एवं लैड एसिड बैट्री के सैलों को बनाने के लिए सीसा उपयोग में लिया जाता है। यह भी विद्युत का चालक होता है।

10) जस्ता ( Zinc )

यह विद्युत का अच्छा चालक होता है। यह सैलों में कन्टेनर बनाने के काम आता है। लोहे को जंग से बचाने के लिए जस्ते की परत चढ़ाई जाती है।

11) टंगस्टन ( Tungsten )

इसका गलनांक उच्च ( 3400 ° C ) होता है। यह कठोर धातु है । इसका उपयोग लैम्पों , ट्यूबलाइटों के फिलामेन्ट बनाने में किया जाता है।

  1. चुम्बक बनाने में प्रयुक्त होने वाली स्टील में इसका प्रयोग किया जाता है।
  2. यह हाई स्पीड स्टील बनाने में प्रयोग में आता है।

12) गैसें ( Gases )

हीलियम गैस, ऑर्गन गैस, निऑन गैरा विद्युत की चालक होती है । इनकी विशेषता यह होती है कि कम तापमान पर इनका प्रतिरोध अधिक एवं अधिक तापमान पर कम हो जाता है।

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