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वर्नियर कैलिपर के प्रकार

Types of vernier calliper

(1.) डैप्थ गेज वर्नियर कैलिपर

इस कैलिपर में बीम (beam) के पिछले हिस्से में कैरियर के साथ एक डैप्थ बार लगी होती है। डैप्थ बार, बीम के पिछले हिस्से में बने आयताकार स्लॉट में लगी होती है तथा स्केल पर आगे-पीछे चलती है। इस प्रकार के कैलिपर (calliper) के द्वारा बाहरी, आन्तरिक माप व गहराई की माप तीनों ली जा सकती हैं इसी कारण से इसे यूनीवर्सल कैलिपर (universal calliper) भी कहा जाता है। (वर्नियर कैलिपर के प्रकार)

(2.)फ्लैट एज वर्नियर कैलिपर

इस कैलिपर में मापने वाली सतह चपटी (flat) होती है, इसलिए इसे फ्लैट एज वर्नियर कैलिपर कहा जाता है। इनके जॉ की बाहरी सतह उत्तल होती है। इनके द्वारा बाहरी व आन्तरिक दोनों माप (लम्बाई, चौड़ाई, मोटाई, व्यास(dia) आदि) ली जा सकती हैं। (वर्नियर कैलिपर के प्रकार)

(3.)नाइफ एज वर्नियर कैलिपर

इस कैलिपर की मापने वाली सतह चाकू (knife) की धार के समान होती है। इस कैलिपर का उपयोग (use) कभी-कभी किया जाता है। इसकी मापने वाली सतह बहुत संवेदनशील होती है, जिसके कारण वह जल्दी ही खराब हो जाती है।
इस कैलिपर का उपयोग दो छिद्रों के मध्य अन्तर निकालने में किया जाता है।

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(4.)फ्लैट और नाइफ एज वर्नियर कैलिपर

इस वर्नियर कैलिपर के जबड़े (jaw) में एक ओर नाइफ एज व दूसरी ओर फ्लैट सतह होती है। इसके द्वारा आन्तरिक व बाहरी माप ली जा सकती है।

(5.)डायल वर्नियर कैलिपर

यह कैलिपर रैक और पिनियन के सिन्द्धान्त (principle) पर कार्य करता है। इसके मेन स्केल पर एक परिशुद्ध रैक लगा होता है तथा इस रैक के साथ डायल गेज या पिनियन मैश करता है। और थम्ब रोल के द्वारा मूवेबल जबड़े (movable jaw) को चलाया जाता है।
साधारण वर्नियर कैलिपर से माप लेने के लिए वर्नियर स्केल को पढ़कर उसे अल्पतमाँक (Leastcount) से गुणा करके माप निकालनी पड़ती है। इसमें त्रुटि होनेकी सम्भावना होती है। डायल कैलिपर में वर्नियर स्केल के स्थान पर डायल गेज लगा होता है जोकि 100 भागों में बँटा होता है। और इसके केन्द्र पर लगी सुई इसके एक मिमी चलने पर 1000 डिवीजन घूम जाती है। यदि यह सुई एक डिवीजन चलती है, तो कैलिपर 0.01 मिमी की दूरी तय करता है। अतः इस कैलिपर की अल्पतमाँक 0.01 मिमी होती है।

उपयोग कैसे करें?

सबसे पहले इसके दोनों जबड़ों को आपस में मिलाकर यह चेक करते हैं, कि डायल गेज (dial gauge) के डायल की सुई डायल के शून्य पर मिलती है या नहीं। तब इसकी सुईं न मिलने पर डायल (dial) को घुमाकर सुई को डायल के शून्य से मिला लेते हैं। इसके बाद जबड़ों को खोलकर जॉब को पकड़ते हैं और मेन स्केल तथा डायल की रीडिंग लेकर जोड़ लेते हैं।

More Information:- कॉम्बीनेशन सैट के बारे में

(6.)डिजिटल वर्नियर कैलिपर

यह डायल गेज कैलिपर से अपेक्षा अधिक सरलता से रीडिंग देने में सक्षम होता है। इसमें वर्नियर स्केल (vernier scale) के स्थान पर स्क्रीन होती है।
जैसे-जैसे हम वर्नियर कैलिपर (vernier calliper) को खोलते हैं स्क्रीन पर कैलिपर के बीच की दूरी प्रदर्शित होती रहती है। और यह दशमलव के दो अंकों तक मिमी में दूरी को दर्शाता है; जैसे- 20.09 मिमी या 13.76 मिमी आदि।

(7.)गियर टूथ वर्नियर कैलिपर

इसका उपयोग स्पर गियर (spur gear) के दाँतों की बनावट को चेक करने में किया जाता है। यह दो कैलिपर का मिश्रित रूप है। इसमें एक डैप्थ बार लगी होती है, जिसके ऊपर ब्रिटिश व मीट्रिक (british and metric) दोनों प्रणालियों में मापें अंकित रहती हैं।
इसके द्वारा प्रमुख रूप से दो माप ली जाती हैं इसके द्वारा 0.02 मिमी मीट्रिक प्रणाली तथा 0.001″ तक परिशुद्धता तक जाँच कर सकते हैं।

  • गियर का कॉर्डल अडैण्डम
  • गियर की कॉर्डल मोटाई

यदि किसी गियर की व्यासीय पिच (diameter pitch) तथा दाँतों की संख्या की जानकारी है तो निम्न सूत्रों के द्वारा उसका कॉर्डल अडैण्डम तथा कॉर्डल मोटाई का पता लगाया जा सकता है और वर्नियर गियर टूथ कैलिपर के द्वारा की जाँच व माप (check and measure) की जा सकती है।
कॉर्डल अडैण्डम = पिच व्यास/2 (1-cos 90°/N)+ अडैण्डम
यहाँ पर पिच व्यास = दाँतों की संख्या/व्यासीय पिच
तथा अडैण्डम = 1/व्यासीय पिच
कॉर्डल मोटाई = PD sin 90°/N
सबसे पहले कैलिपर के ऊपरी स्केल को कॉर्डल अडैण्डम (Cordal adandum) के बराबर सैट कर लिया जाता है, जिससे कैलिपर के दोनों जबड़े पिच सर्किल को छू सकें। इसी पिच वृत्त पर दाँते (teeth) की मोटाई मापी जाती है। इसके अतिरिक्त इनसे पिच व हब के साइज भी मापे जाते हैं। (वर्नियर कैलिपर के प्रकार)

सावधानियाँ

  1. वर्नियर कैलिपर (vernier calliper) एक सूक्ष्ममापी यन्त्र है, इसको सावधानी से रखना चाहिए। और इसको नीचे गिरने या अन्य हस्त औजारों की चोट लगने से बचाया जाना चाहिए।
  2. इस यन्त्र को कटिंग टूल (cutting tool) से अलग रखना चाहिए।
  3. मापते समय इस पर अधिक दबाव (pressure) नहीं डालना चाहिए।
  4. मापने से पहले शून्य त्रुटि (zero error) चेक कर लेनी चाहिए।
  5. फाइन एडजस्टिंग स्क्रू (fine adjusting screw) का उपयोग करते समय अधिक बल नहीं लगाना चाहिए।
  6. इसके जबड़े (jaw) जॉब पर कम-से-कम रगड़ खाने चाहिए, क्योंकि अधिक रगड़ खाने से जल्दी घिस सकते हैं।
  7. चलती हुई मशीन पर घूमते हुए जॉब पर इसके द्वारा कभी भी माप (measure) नहीं लेनी चाहिए
  8. वर्नियर कैलिपर का चयन (select) जॉब के अनुसार करना चाहिए।

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