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कंप्यूटर का इतिहास क्या है?

कंप्यूटर का इतिहास लगभग 2000 साल पहले बेबीलोनिया (मेसोपोटामिया) में शुरू होता है, अबेकस के जन्म के समय, एक लकड़ी का रैक जिसमें दो क्षैतिज तार होते हैं, जिन पर मोतियों की माला होती है। ब्लेज़ पास्कल को आमतौर पर 1642 में पहला डिजिटल कंप्यूटर बनाने का श्रेय दिया जाता है।

कंप्यूटर का इतिहास क्या है?

आधुनिक कंप्यूटरों को अस्तित्व में आए लगभग 50 वर्ष ही हुए हैं, लेकिन Computer विकास का इतिहास बहुत पुराना है। जिस समय मनुष्य ने गिनना सीखा है तभी से उसका प्रयास रहा है की गणना करने में सहायता करने वाले यंत्रों का निर्माण किया जाए।

History of Computer
Computer

संख्या पद्धति (Number System) के उपयोग तथा भारतीय गणितज्ञ द्वारा शून्य का आविष्कार किए जाने के बाद मानव के लिए संख्याओं का महत्व बहुत बढ़ गया था। इसलिए गणना में सहायक यंत्रों की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी। कंप्यूटर के इतिहास के बारे में निम्न प्रकार से है-

1.Abacus (गिनतारा)

यह सबसे सरल व पहला यंत्र है, जिसका use गणना करने में सहायता के लिए किया जाता था। Abacus लकड़ी का एक आयताकार ढांचा होता है, जिसमें 9 या 10 क्षैतिज छड़ें होती हैं। प्रत्येक क्षण में 7 दाने होते हैं, जिन्हें एक लंबवत् छड़ों द्वारा इस प्रकार बांटा जाता है कि एक और 5 दाने हों और दूसरी ओर 2 दाने हों।

2.Napier’s Bones (नेपियर बोन्स)

जॉन नेपियर ने सन् 1617 में कुछ ऐसी आयताकार पट्टियों का निर्माण किया था, यह स्कॉटलैंड के रहने वाले थे। पट्टियों की सहायता से गुणा करने की क्रिया अधिक शीघ्रतापूर्वक की जा सकती थी। यह पट्टियां जानवरों की हड्डियों से बनी थीं, इसलिए इन्हें नेपियर बोन्स (Napier Bones) कहा गया।

3.Slide Rule (स्लाइड रूल)

Napier ने सन् 1617 में गणनाओं की लघुगणक विधि का आविष्कार कर लिया था। Slide Rule विधि में दो संख्याओं का गुणनफल, भागफल, वर्गमूल आज किसी चुनी हुई संख्या के घातांक को को जोड़कर या घटा कर निकाला जाता है। आज भी बड़ी- बड़ी गणनाओं में, यहां तक कि कंप्यूटर में भी स्लाइड रूल का उपयोग किया जाता है।

4.Pascal’s Calculator (पास्कल का गणना यंत्र)

फ्रांसीसी गणितज्ञ और दार्शनिक ब्लेज पास्कल ने सन् 1642 में गणनाएं करने वाला पहला वास्तविक यंत्र बनाया था, जिसे पास्कल का कैलकुलेटर या पास्कल की एडिंग मशीन कहा जाता है।

इस यंत्र का उपयोग संख्याओं को जोड़ने और घटाने में किया जाता था। इस यंत्र में कई दांतेदार पहिए और डायल होते थे। प्रत्येक चक्र के 10 भाग होते थे, वह आपस में इस प्रकार जुड़े होते थे कि जैसे ही कोई चक्र एक बार पूरा घूम जाता था, तो उससे बाईं ओर का चक्र केवल एक भाग घूमता था। जिससे हासिल का प्रभाव उत्पन्न होता था। दो संख्याओं का योग अथवा अंतर एक संख्या को डायल करके तथा दूसरी संख्या के बराबर चक्रों को क्रमशः घुमाकर ज्ञात किया जाता था।

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5.Mechanical Calculator of Leibnitz (लेबनिज का यांत्रिक कैलकुलेटर)

गणितज्ञ लेबनिज जर्मनी के रहने वाले थे। इन्होंने सन् 1671 में पास्कल के कैलकुलेटर में कई सुधार करके एक ऐसी जटिल Machine को बनाया, जो घटाने तथा जोड़ने के साथ ही गुणा करने तथा भाग देने में भी सक्षम थी। इस यंत्र से गणनाएं करने की गति बहुत तेज हो गई। इस Machine का व्यापक पैमाने पर उत्पादन किया गया।

6.Difference Engine of Babbage (बैबेज का एनालिटिकल इंजन)

बैबेज का पूरा नाम ‘चार्ल्स बैबेज’ है। यह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के गणित के प्रोफेसर थे। इनको आधुनिक कंप्यूटरों का जनक कहा जाता है। गणित के क्षेत्र में बैबेज का पहला महत्वपूर्ण योगदान था। इन्होंने एक ऐसा यंत्र बनाने में योगदान दिया था, जो विभिन्न बीजगणितीय फलनों का मान दशमलव के 20 स्थानों तक शुद्धतापूर्वक ज्ञात कर सकता था।

इस Machine को Difference Engine कहा जाता था, क्योंकि यह इस सिद्धांत के आधार पर बनाया गया था कि किसी बीजगणितीय बहुघातीय फलन (Polynomial) में पास-पास के दो मानों का अंतर हमेशा नियत रहता है।

7.Punched Card Devices (पंचकार्ड उपकरण)

प्रारंभ में जितने भी गणना यंत्र बनाये गए, उनमें संख्याओं को डायल करने के लिए दांतेदार पहियों को हाथ से घुमाया जाता था। लेकिन चार्ल्स बैबेज ने पहली बार यह सोचा था कि संख्या पढ़ने का काम होल किए हुए कार्ड द्वारा भी किया जा सकता है। यह विचार उन्हें जैकार्ड की बुनाई मशीन को देखकर प्राप्त हुआ था।

जोसेफ-मेरी जैकार्ड फ्रांस के एक बुनकर और टैक्सटाइल इंजीनियर थे। सन् 1801 में उसने एक ऐसी बुनाई मशीन का निर्माण किया, जिसमें बुनाई की डिजाइन डालने में होल किए हुए कार्डों का उपयोग किया जाता था। यह कार्ड एक अंतहीन श्रृंखला में एक के बाद बार-बार आते रहते थे, इसलिए वह कार्डों पर किए हुए होल के अनुसार बुनाई का डिजाइन डालने में सक्षम था। दूसरे शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि बुनाई की डिजाइन का Input उन कार्डों पर था।

जैकार्ड की इस खोज का असली महत्त्व काफी समय बाद चार्ल्स बैबेज ने पहचाना। वास्तव में उन्होंने अपने एनालिटिकल इंजन की जो डिजाइन तैयार की थी, उसमें इनपुट देने का काम होल किए हुए कार्डों द्वारा ही किया जाना था।

8.Initial Computers (प्रारम्भिक कंप्यूटर)

सन् 1930 के दशक तक बनाई गई सभी Calculating Machines मूल रूप से यान्त्रिक हुआ करती थीं। लेकिन इसी समय के आस-पास आई. बी. एम. ने हॉवर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. हॉवर्ड ऐकिंस तथा ग्रेस हॉपर को एक बहु उपयोगी विद्युतीय कंप्यूटर बनाने के लिए सहमत किया।

इसके परिणामस्वरूप सन् 1943 में मार्क (Mark) नामक कंप्यूटर अस्तित्व में आया। मार्क बहुत विशाल आकार का यंत्र था। उसकी लंबाई 15 मीटर तथा उसमें लगे तारों की कुल लंबाई 800 किमी थी।

उसमें हजारों की संख्या में विद्युत-चुम्बकीय रिले (Electromagnetic Relay) तथा दूसरे पुर्जे लगे हुए थे। यह पहला सामान्य कंप्यूटर था, जो Programs को भण्डारित करके उनका पालन कर सकता था।

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