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तार क्या है? | धारा वहन क्षमता | तार की विशिष्टताएं

विद्युत धारा के निरन्तर प्रवाह के लिए मार्ग प्रस्तुत करने वाल गोलाकार क्रॉस सेक्शन वाला बिना आवरण का चालक अथवा आवरण युक् ‘ इन्सुलेटेड ‘ चालक , तार कहलाता है अथवा कोई भी चालक जो पूरी लम्बाई में समान व्यास वाला हो तथा काट क्षेत्रफल गोल हो, उसे तार कहते हैं। इन पर इन्सुलेशन बाद में चढ़ाया जाता है। इन्हें नंगा तार कहते हैं। जैसे- GI तार अर्थ तार, ओवरहैड लाइन में प्रयोग में ली जाने वाले तार, SE तार व कॉटन चढ़ी तार, इन्सुलेटेड तार कहलाते हैं। PVC चढ़े तार PVC कहलाते हैं।

वायरिंग में प्रयोग किए जाने वाले तार ( Wire Used in Wiring )

  1. फ्लैक्सिबल तार ( Flexible Wire )– ये तार अस्थायी वायरिंग में काम आते है। इसमें PVC कवर के नीचे तांबे की कई अधिक गेज की तारे होती हैं। वैद्युत संस्थापन में ये 250V तक प्रयोग में लाए जाते हैं। इनका उपयोग छत के पंखों को लटकाने वाले लैम्प होल्डर के संयोजन के लिए किया जाता है। इन पर PVC का इन्सुलेशन चढ़ाया जाता है।
  2. पी.वी.सी. तार ( P.V.C , Wire )– पी.बी.सी. का पूरा नाम पॉली विनाइल क्लोराइड है। वर्तमान में ये तार वायरिंग में प्रमुखता से काम में आ रहे हैं। ये PVC तार घरों में व उद्योगों में अलग-अलग साइज के काम आते हैं। ये 2 मिमी , 4 मिमी , 6 मिमी व 3/20 , 3/22 , 7/20 , 7/22 साइज में आते हैं। वैद्युत संस्थापन ये 250 से 1100 वोल्टता तक प्रयोग में लाए जाते हैं।
  3. वी. आई. आर. तार ( V.I.R. Wire )- VIR का पूरा न वल्केनाइज्ड इण्डियन रबड़ है। इस तार का प्रयोग वायरिंग किया जाता है। इसका इन्सुलेशन भारतीय रबड़ से किया जाए है। वैद्युत संस्थापन में ये 250 से 1100 वोल्टता तक प्रयोग लाए जाते हैं।
  4. लेख शीड तार ( Lead Sheathed Wire )- इन तारों के ऊपर लैड का कवर चढ़ा होता है। नमी एवं अम्लों ( Acids ) का असर इन पर नहीं होता है। ये मुख्यतः बर्फीले इलाको वर्षा वाले स्थानों पर प्रयोग में आते है वैद्युत संस्थापन में ये 250 से 650 वोल्टता तक प्रयोग में लाए जाते हैं। इसका विद्युत रोधन CTS तारों के समान होता है।\
  5. सी.टी.एस. या टी.आर.एस. तार ( C.T.S. or T.R.S. Wire )- इसका पूरा नाम चीमड़ रबड़ कोषित ( Tough Rubber Sheathed ) तार है। इसमें लचीली रबड़ को विद्युतरोधन (insulating) के रूप में बाहरी परत में चढ़ाया जाता है। वैद्युत संस्थापन (electrical installation) में ये 250 वोल्टता तक प्रयोग में लाए जाते हैं। इनका उपयोग बैटन (baton) तथा कन्ड्यूट वायरिंग (conduit wiring) में किया जाता है। इनका इन्सुलेशन लथीली रबड़ (soft rubber) के ऊपर चीमड़ ( Tough ) रबड़ चढ़ाकर किया जाता है।
  6. ऋतु – सह तार ( Weather – proof Wire )- इन तारों के निर्माण में नग्न ( Bare ) या एल्युमिनियम तार पर वी.आई.आर. ( VIR ) तार के समान विद्युतरोधन (insulating) बाहरी आवरण में चढ़ाया जाता है उसके बाद सूती टेप (cotton tape) को , वाटर प्रूफ मिश्रण को रबड़ विद्युतरोधन (insulating) पर लगाकर लपेटा जाता है, अन्त में ऊपर से मोम (wax) की परत चड़ाई जाती है। वैद्युत संस्थापन (electrical installation) में ये 250 वोल्टता तक प्रयोग में लाए जाते हैं। इनका उपयोग खुले वातावरण में अस्थाई विद्युत लाइन के रूप में किया जाता है।
तार क्या है  धारा वहन क्षमता  तार की विशिष्टताएं
Electric Fuse Wire Network Cables Electricity

विद्युत के कार्यों में प्रयोग में ली जाने वाली तार ( Wires Used in Electric Works )

  1. ताम्बे के तार ( Copper Wires )- ताम्बे से बने तार दो प्रकारके होते हैं।
    • कठोर ताम्बा ( हार्ड ड्रॉन ताम्बा )
    • नरम ताम्बा ( एगील्ड ताम्बा ) हार्ड ड्रोन तांबे से ओवरहैड लाइन तार एवं अर्थिग तार जबकि एनील्ड ताबे से वायरिंग तार व वॉयडिंग तार बनाया जाता है।
  2. एल्युमिनियम तार ( Aluminium Wire )- यह घरों में होने वाली वायरिंग ताम्बे की अपेक्षा सस्ती में प्रमुखता (prominence) से प्रयोग किया जाता है। यह तांबे की अपेक्षा सस्ती होती है। ये तार ट्रांसमिशन (Transmission) में ओवरहेड लाइन में बहुत अधिक उपयोग किये जाते हैं। ये वजन में हल्के होते हैं। इन्हें नरम होने के कारण स्ट्रेण्डिड किये जाते हैं। इसके जोड़ों ( लग ) के थिम्बल को क्रिपिंग टूल से लगाते हैं।
  3. लौहे की तार ( Iron Wire )- इनमें प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। इनका उपयोग रेलवे , टेलीफोन लाइनों में अधिक करते हैं।
  4. GI तार ( GI Wire )- लोहे की तारे यदि गल्वेनाइज्ड की हुई हो तो इन्हें अर्थिंग तार के रूप में प्रयोग में लेते हैं। 8 SWG व 19 SWG की तारे अधिक प्रयोग में आती हैं।
  5. बाइन्डिंग तार ( Winding Wires )- एनील्ड किया हुआ ताम्बे का चालक सामान्यतः आकार में गोल व लम्बाई लिए होता है। ये निम्न प्रकार के होते हैं-
    • सुपर इनेमल ताम्बा तार ( S.E. )
    • सूत से चढ़ा एक परत का धागा तार ( S.C.C. )
    • दोहरा सूती – आवर्णित तार ( D.C.C. )
    • एकल सिल्क अवर्णित ताम्बा तार ( S.S.C. )
    • दोहरा सिल्क आवर्णित ताम्बा तार ( D.S.C. )
    • P.V.C. आवर्णित ताम्बा तार या .P.V.C . ( कवरिंग ) ताम्बा तार कुछ D.C. मशीनों की बाइन्डिंग में D.C.C. व D.S.C , तार प्रयोग में आते हैं। सबमर्सिबल मोटर में P.V.C. चढ़ा ताम्बा तार काम में आता है। 3Φ मोटरों व ट्रांसफॉर्मर व अन्य वॉयन्डिंग में सुपर इनेमल ( S.E. ) तार काम में आता है।
  6. स्ट्रेण्डिड तार ( Stranded Wire )- एक साथ कई ( 3,7 तारों ) तारों को रस्सी की तरह लपेट दिया जाए तो ये स्ट्रेण्डिड कहलाते हैं। शिरोपरी लाइन में स्ट्रेण्डिड तार लगे होते हैं। ये लचकदार व यान्त्रिक सुदृढ़ हो जाते है।
  7. यूरेका तार ( Eureka Wire )- 60 % तांबा तथा 40 % निकिल धातुओं से तैयार की गई मिश्र धातु से बनाया गया नंगा तार यूरेका तार कहलाता है। ये तार रियोस्टेट एवं स्टार्टर में प्रयोग में आते हैं।
  8. नाइक्रोम तार ( Nichrome Wire )- 80 % निकिल तथा 20 % क्रोमियम धातुओं से तैयार की गई मिश्र धातु से बनाया गया नंगा तार नाइक्रोम कहलाता है। नाइक्रोम तारों का उपयोग हीटिंग एलीमेन्ट बनाने में होता है। यह 1150 ° C पर सुरक्षित ढंग से कार्य कर सकता है। 20 ° C पर 110 µΩ/cm विशिष्ट प्रतिरोध होता है।
  9. कैंथल तार ( Kanthal Wire )- इनका तारों का प्रयोग चीनी मिट्टी के भिन्न – भिन्न कार्यों में व बड़ी – बड़ी भट्टियों में स्टील को गर्म करने में काम आता है। 20 ° C पर विशिष्ट प्रतिरोध 135µΩ/cm है।

तारों की धारा वहन क्षमता ( Current Carrying Capacity of Wires )

“सामान्य तापमान ( प्रायः 40 ° C ) पर विद्युत धारा का वह अधिकत मान , जो किसी तार में से सुरक्षित रूप से प्रवाहित हो सक , उस तार की विद्युत धारा वहन क्षमता कहलाती है।”

तार की मोटाई जितनी अधिक होती है उसकी धारा वहन क्षमता उतनी ही अधिक होती है अतः किसी तार की विद्युत धारा वहन क्षमता उस तार के धातु के विशिष्ट प्रतिरोध और उसके व्यास तथा स्टैण्ड्स की संख्या पर निर्भर करती है । किसी तार के लिए विद्युत धारा का वह न्यूनतम मान जिस पर वह तार पिघल कर टूट जाता है फ्यूजिंग विद्युत धारा के मान को दर्शाता है । तार की मोटाई जितनी अधिक होती है उसकी फ्यूजिंग विद्युत धारा का मान भी उतना ही अधिक होता है ।

स्टैण्डर्ड वायर मेज ( Standard Wire Gauge )

इस गेज का प्रयोग तार और शीट की मोटाई नापने के लिए किया जाता है इसकी पूरी परिधि पर अलग – अलग साइज के स्लॉट कटे होते . है जिन पर उसका साइज लिखा होता है । जिस स्लॉट में शीट या तार सही आता है वही उसका साइज होता है।

कार्यशालाओं में स्टैण्डर्ड वायर गेज ( SWG ) का प्रयोग प्रमुखता से किया जाता है । भारतीय मानक ब्यूरो ( BIS ) के अनुसार इस गेज द्वारा 0.125 मिमी से 8 मिमी तक मोटी शीट या तार का व्यास मापा जाता है । तार का व्यास मापने के लिए पहले इन्सुलेटर हटाकर कंडक्टर को साफ कर लेते है और फिर अंदाजे से स्लॉटों में डालते हैं।

तार जिस स्लॉट में अच्छी तरह सेट हो जाए और छेद में चली जाए ( न ढीला न तंग ) तो उस स्लॉट पर लिखा नं . तार का गेज होगा तथा उसकी विपरीत ओर व्यास लिखा होगा ध्यान दें कि तार केवल स्लॉट में डालकर मापें , ना कि छेद में डालकर तार का छोटे से छोटा नं . 46 होता है जबकि गेज से सिर्फ 40 नं . तक माप सकते हैं और बड़े से बड़ा नम्बर 0000000 ( Seven Zero ) होता है जिसका अर्द्ध – व्यास 0.5 मिमी होता है । 41 से 46 नं . तक के तार माइक्रोमीटर से नापते हैं।

तार की विशिष्टताएं ( Specifications of Wire )

विशिष्टता का तात्पर्य किसी कार्य में प्रयुक्त सामग्री की गुणता सम्बन्ध में व्याख्या से है ताकि सामग्री का भली – भांति निरीक्षण करके सही स्थान पर प्रयोग कर सके । विद्युत तार की विशिष्टता से तात्पर्य उसके इन्सुलेशन , आकार कोर की संख्या तथा कन्डक्टर सामग्री से है । इनके द्वारा तार की धारा तथा वोल्टेज सहन करने की क्षमता ज्ञात की जाती है।

सामान्यतः तांबे या एल्युमिनियम के तार प्रयुक्त होते हैं जो सिंगल स्ट्रैंड या मल्टी स्ट्रैंड हो सकते हैं ये तार भिन्न – भिन्न व्यास तथा कोर की संख्या या स्ट्रैंड में हो सकते हैं । जैसे VIR चालक को 1/20 3/22 7/20 आदि साइज | से स्पेसिफाई किया जाता है जिसमें अंश ( Numerator ) स्ट्रेंड की संख्या को दर्शाता है जबकि हर ( Denominator ) तार के व्यास को दर्शाता है ।

घरेलु वायरिंग में – लाइटिंग हेतु 3/20 तांबे के तार

हीटिंग हेतु – 7/20 तांबे का तार

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