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ट्रांसफॉर्मर की संरचना | ट्रांसफॉर्मर के भाग | Transformer ki sanrachna

नमस्कार दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको ट्रांसफार्मर की संरचना के बारे में बताने जा रहे हैं ट्रांसफार्मर की संरचना कैसी होती है। इसकी संरचना मे कोन कोन से भाग होते है। इसके बारे में आपको पूरी जानकारी देने वाले हैं। और ट्रांसफार्मर में कौन-कौन सी वाइंडिंग होती है। इन सब की जानकारी आपको देंगे अगर आप जानना चाहते हैं तो इसलिए को पूरा जरूर पढ़ें तो चलिए शुरू करते है।

ट्रांसफॉर्मर की बनावट में निम्न मुख्य भाग होते हैं-

  1. प्राथमिक वाइन्डिंग ( Primary Winding )
  2. द्वितीयक वाइन्डिंग ( Secondary Winding )
  3. लेमीनेटेड कोर ( Laminated Core )
  4. कन्टेनर या टैंक ( Container or Tank )
  5. टर्मिनल ( Terminal )
  6. ट्रांसफॉर्मर ऑयल
  7. थर्मल एंड बुसिंग
  8. कन्वर्जन टैंक
  9. बुकोज रिले
  10. ब्रीदर (Breather)
  11. एक्सप्लोजन वाल्व
  12. कूलिंग ट्यूब
  13. एंड रेडिएटर
  14. सिलिका जेल
ट्रांसफॉर्मर की संरचना  ट्रांसफॉर्मर के भाग  Transformer ki sanrachna
ट्रांसफॉर्मर की संरचना ट्रांसफॉर्मर के भाग Transformer ki sanrachna

प्राथमिक वाइन्डिंग ( Primary Winding )

जिस वाइन्डिंग में ए.सी. सप्लाई दी जाती है, वह प्राथमिक वाइन्डिंग कहलाती है। यह सी.ई. तार द्वारा की जाती है । यह बोबिन के ऊपर कुण्डली coil ) बनाकर टर्न देकर तैयार की जाती है। इसमें टनों की संख्या आवश्यक फ्लक्स घनत्व उत्पन्न करने की क्षमता के अनुसार दी जाती है।

द्वितीयक वाइन्डिंग ( Secondary Winding )

जिस वाइन्डिंग से भार के लिए शक्ति ली जाती है, वह द्वितीयक वाइन्डिंग कहलाती है । इसकी तार का गेज या साइज गुजरने वाली धारा पर निर्भर रहता है कि कितनी वोल्टेज की आवश्यकता है , उसी अनुसार इस वाइन्डिंग में टनों का निर्धारण किया जाता है ।

लेमीनेटेड कोर ( Laminated Core )

ट्रांसफार्मर की कोर आयरन और सिलिकॉन स्टील से बनाई जाती है. इसका मुख्य कार्य चुंबकीय फ्लक्स के लिए रास्ता प्रदान करता है। जिस से कोर में स्थिति दूसरी वार्निंग तक पहुंचता है यह कोर बहुत पतले पतले शीट से बनी होती हैं। जिसको मिलाकर के ट्रांसफार्मर बनता है। 1 सीट की मोटाई लगभग 0.5 एमएम तक होती है। प्रत्येक पटलित कोर आपस में इन्सुलेटेड रहती है।

  1. कोर चुम्बकीय फ्लक्स को कम रिलक्टेन्स का रास्ता प्रदान करती है।
  2. कोर के ऊपर प्राथमिक तथा द्वितीयक वाइन्डिंग की जाती है।
  3. सिलिकॉन ओर स्टील का प्रयोग अच्छी परमियबिलिटी प्रदान करता है व हिस्टैरिसीस हानि को कम करता है।
  4. 25 Hz आवृत्ति हेतु 0.5mm मोटी व 50Hz आवृत्ति के लिए 0.35mm मोटी कोर काम में लेते हैं।
  5. इन कोरों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि इनके बीच वायु अन्तराल ( air gap ) कम रहे ।

कन्टेनर या टैंक ( Container or Tank )

टैंक ट्रांसफॉर्मर को ठंडा रखने में सहायता करता है। इसमें तेल भरा रहता है। जो इन्सुलेशन तथा ट्रांसफॉर्मर को ठण्डा रखने के लिए माध्यम का काम करता है। वाइन्डिंग को रोके रखने का कार्य भी टैंक करता है।

टर्मिनल ( Terminal )

यह कुण्डली के सिरों पर सप्लाई लेने व देने का कार्य करते हैं। इनसे विद्युत दी व ली जाती है। ट्रांसफॉर्मर की सिंगल फेज व थ्री फेज की बनावट थोड़ा अन्तर होता है। थ्री फेज ट्रांसफॉर्मर में बकोल्स रिले, प्रेशर, टेम्प्रेचर गेज आदि लगे होते हैं।

बुकोज रिले ( Buchholz relay)

ब्रीदर (transformer breather)

ब्रीदर एक स्टील ट्यूब होती है। जो कंजर्वेटर टैंक से जुड़े हुए ट्रांसफार्मर का एक उपकरण होता है। जिसमें सिलिका जेल भरा होता हैं जो नमी को अवशोषित करता है। जो हवा में निहित नमी को अवशोषित करने के लिए कैल्शियम क्लोराइड और सिलिका जेल के माध्यम से हवा को टैंक या संरक्षक के अंदर और बाहर जाने की अनुमति देने के लिए कंजर्वेटर के एक तरफ से जुड़ी होती है।

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