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फोर्जिंग के बारे में

फोर्जिंग क्या है?

किसी भी धातु को प्लास्टिक अवस्था तक गर्म करके, उस पर दबाव डालकर विरूपण करने की प्रक्रिया को फोर्जिंग (forging) कहते हैं। पुराने जमाने से लौहार भट्ठी में छोटे-छोटे धातु के टुकडो़ को लाल गरम करके हैण्ड हैमर से पीटकर लौहकारी द्वारा विशेष आकार व आकृति देते आए हैं। बड़े आकार को डिफॉर्म करने के लिए पॉवर हैमर, ड्रॉप हैमर या forging मशीन का प्रयोग फोर्जिंग कहलाता है। forging द्वारा प्राप्त ब्लैंक पर कोई भी मशीनिंग प्रक्रिया आसानी से की जा सकती है।

फोर्जिंग के लाभ तथा हानियां

लाभ

  1. इस प्रक्रिया में धातु का कोई स्क्रैप (scrap) नहीं बनता।
  2. यह प्रक्रिया (process) बहुत कम समय (time) में हो जाती है।
  3. इसमें बहुत कम श्रम लगता है।
  4. इस प्रक्रिया के बाद जॉब (job) की धातु के यान्त्रिक गुणों (machanical properties) में विकास होता है।
  5. इस प्रक्रिया से जॉब की धातु के कणों की आन्तरिक संरचना (internal structure) में सुधार होता है, जिससे उसकी इलास्टिसिटी, टफनैस तथा धक्का सहन करने की शक्ति बढ़ जाती है।
  6. इसके के द्वारा, कोल्ड वर्किंग (cold working) से आए दुर्गुण समाप्त हो जाते हैं।

हानियां

  1. धातु को जब प्लास्टिक अवस्था (plastic stage) तक गर्म किया जाता है तो उसकी ऊपरी सतह पर ऑक्साइड की पपड़ी जम जाती है, इसके कारण सतह की फिनिशिंग खराब हो जाती है।
  2. Forging के द्वारा जॉब की विमाएँ बहुत एक्युरेट नहीं बनाई जा सकतीं। अत: forging के बाद मशीनिंग करना जरूरी हो जाता है।
  3. यदि धातु का तापमान (temperature) कम रह जाए तो विरूपण के समय इसमें दरारें आ सकती हैं तथा अधिक हो जाए तो धातु जल सकती है, इसलिए अधिक अनुभव की आवश्यकता रहती है।
  4. सभी धातुओं की फोर्जिंग नहीं की जा सकती। कुछ धातुएँ गर्म होने पर भंगुर (britilness) हो जाती हैं; जैसे-कास्ट आयरन आदि। अलौह धातुएँ ठण्डी अवस्था में ही फोर्ज की जा सकती है।

More Information:-मार्किंग मीडिया के बारे में

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