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बैट्री की चार्ज दर क्या होती है? | घनत्व मापना | प्रभाव

बैट्री की चार्ज दर निर्माता द्वारा दी गयी रेटिंग के आधार पर निर्धारित होती है। बैट्री की सुरक्षित दर ( धारा ), बैट्री कैपेसिटी ( क्षमता ) को समय ( घण्टों ) से भाग देकर आसानी से निकाली जा सकती है।

  • आवेशित धारा = कैपेसिटी ( क्षमता ) / घण्टे
  • कैपेसिटी ( क्षमता ) = निरावेशन धारा x घण्टे
  • बैट्री की सुरक्षा हेतु अधिक करन्ट देकर जल्दी चार्ज करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

बैट्री के आवेशन स्थिति की जांच ( Checking of Charging Condition of a Battery )

बैट्री के आवेशन स्थिति की जांच निम्न प्रकार की जा सकती है-

  1. आपेक्षिक घनत्व द्वारा
  2. वोल्टेज द्वारा
  3. गैस द्वारा
  4. टर्मिनलों के रंग द्वारा

बैट्री के आवेशन स्थिति की जांच की विधियां निम्न प्रकार हैं।

हाइड्रोमीटर द्वारा आपेक्षिक घनत्व मापना ( Measurement of Relative Density using Hydrometer )

लैड एसिड सैल में इलैक्ट्रोलाइट को H2 SO4 में शुद्ध जल मिलाकर तैयार किया जाता है। आपेक्षिक घनत्व मापकर इलैक्ट्रोलाइट की स्थिति देखी जाती है। हाइड्रोमीटर कांच की बनी नली होती है ( इसे फ्लोड भी कहते हैं ) उसमें एक साइड में बल्ब लगा होता है। उसके दूसरे मुंह को बन्द रखा जाता है एवं भारी करने के लिए सीसे के छर्रे का प्रयोग किया जाता है।

इस हाइड्रोमीटर ट्यूब को बड़ी कांच की नली में चित्रानुसार ( 8.27 ( a ) ) रखते हैं। बड़ी कांच की नली में रबड़ का बल्ब लगा होता है जिसके आगे के सिरे पर रबड़ की ट्यूब इधर उधर मुड़ने के लिए लगी होती है। इस पर H2 SO4 का प्रभाव नहीं पड़ता है। रबड़ के बल्ब को दबाकर नली वाले सिरे को इलैक्ट्रोलाइट में डुबोकर छोड़ते हैं, तो इलैक्ट्रोलाइट ऊपर तक बल्ब में भर जाता है। इस हाइड्रोमीटर ट्यूब पर निशान लगे होते हैं।

बैट्री अवस्थाहाइड्रोमीटर रीडिंग
फुल चार्ज1.26
आधी चार्ज1.20
डिस्चार्ज1.15

आवेशन धारा ( Charging Current )-

किसी बैट्री को आवेशित करते समय यह महत्त्वपूर्ण है कि बैट्री की रेटेड धारा पर आवेशित धारा को व्यवस्थित करें। आवेशित धारा को एम्पियर मीटर में पढ़ा जाता है। जब बैट्री आवेशक समान धारा पर होते हैं तो कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है। धारा प्रवाह उत्पन्न करने हेतु आवेशक वोल्टता का नियोजन मान बैट्री से अधिक रखा जाता है। बैट्री को हमेशा DC स्रोत देना चाहिए।

वोल्टता ( Voltage )-

लैड एसिड बैट्री की वोल्टता प्राथमिक सैल के समान भार लगाकर ज्ञात करनी चाहिए। कार में लगी बैट्री के एक साधारण प्रकाश भार वोल्टता परीक्षण के लिए हैडलाइट को खुला और बन्द रखकर बैट्री की निर्गत वोल्टता का टैस्ट ( परीक्षण किया जाता है व स्टार्टिंग मोटर लगाकर अधिकतम भार का परीक्षण किया जा सकता है। 12V की बैट्री यदि

भार डालने पर वोल्टमीटर में 7 वोल्ट से कम वोल्टेज बताती है तो बैट्री पूर्ण आवेशित नहीं है, उसमें दोष है।

हाइ रेट डिस्चार्ज टैस्टर से टैस्टिंग ( Testing by High Rate Discharge Tester )

इस परीक्षण से सैल की आन्तरिक स्थिति ज्ञात की जाती है। कम स्केल ( 0-3V ) वोल्टमीटर को एक लघु प्रतिरोध से शन्ट कर दिया जाता है। टर्मिनल प्राइस के परीक्षण के लिए एक सैल के टर्मिनल पर दबाव डालते हैं जिससे एक पूर्ण रूप से आवेशित सैल पूर्ण आवेश पाठ्यांक प्रदर्शित करता है। हाइरेट डिस्चार्ज टैस्ट में लाल, पीला हरा तीन रंग होते 16 हैं।

  1. लाल रंग पूर्ण निरावेशन ( डिस्चार्ज )
  2. पीला रंग अर्द्ध निरावेशन ( आधा चार्ज )
  3. हरा रंग पूर्ण आवेशन ( पूर्ण चार्ज )

आवेशित सैल वोल्टता 2.5 से 2.6V और निरावेशित बैट्री वोल्टता 1.8V से 1.6V तक हाइरेट डिस्चार्ज टैस्ट संकेत देता है।

गैस डिस्चार्ज द्वारा ( By Gas Discharge )

यदि लैड एसिड सैल से कोई गैस नहीं निकलती है तो इसका अर्थ है सैल पूर्ण रूप से डिस्चार्ज है। यदि गैस के बुलबुले धीमी गति से निकल रहे हैं तो बैट्री आधी चार्ज है और यदि गैस के बुलबुले तीव्रता से निकल रहे हैं तो बैट्री पूर्ण रूप से चार्ज हो चुकी है।

बैट्री को आवेशित या निरावेशित करने पर धारा वृद्धि के प्रभाव

  1. सल्फेशन ( Sulfation ) लैड एसिड सैल में प्लेटों पर लैड सल्फेट के जम जाने को सल्फेशन कहते हैं। इससे सैल का आन्तरिक प्रतिरोध बढ़ जाता है तथा सैल की क्षमता कम हो जाती है। बैट्री को अधिक आवेशित करके तेजी से निरावेशित किया जाए तब भी सल्फेशन बढ़ पुनः जाती है। इसे ट्रिकल आवेशन विधि से कम किया जा सकता है।
  2. सैडीमेंटेशन ( Sedimentation ) सैलों के नीचे बैठने वाली गन्दगी जो कन्टेनर के कीच घर में जमा हो जाती है, उसे सैडीमेंटेशन कहते हैं। इसके कारण प्लेटों का आपस में लघु परिपथ होने का डर रहता है। इस दोष को दूर करने के लिए इलैक्ट्रोलाइट पूरा बदल देना चाहिए।
  3. बकलिंग ( Buckling ) जब धारा का मान बढ़ाकर बैट्री को आवेशित या निरावेशित किया जाता है तो प्लेटें टेढ़ी हो जाती हैं तथा उनमें यह दोष आ जाता है। ऐसा तापमान के अन्तर के कारण होता है। प्लेटों के टेढ़े हो जाने को बकलिंग कहते हैं। इसके सुधार के लिए टेढ़ी हुयी प्लेटों बदल देना चाहिए।

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