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सुरक्षा के प्रकार ( TYPES OF SAFETY )

सुरक्षा के प्रकार ( TYPES OF SAFETY )

सुरक्षा (SAFETY) से तात्पर्य किसी नुकसान से बचाव करने की व्यवस्था को सुरक्षा कहते हैं। यह व्यक्ति, स्थान, निर्माण, वस्तु, देश, निवास, संगठन या ऐसी किसी भी अन्य चीज़ के सन्दर्भ में प्रयोग हो सकती है जिसे नुकसान पहुँचाया जा सकता हो। किसी व्यक्ति को खतरे के आधार पर सुरक्षा को 5 श्रेणियों में विभाजित किया गया है, SPG, Z+, Z, Y, X आदि। सुरक्षा मुख्यतः तीन प्रकार की होती है-

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  1. शरीर की सुरक्षा
  2. मशीन, औजार एवं उपकरण की सुरक्षा
  3. कार्य की सुरक्षा
सुरक्षा के प्रकार ( TYPES OF SAFETY )
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शरीर की सुरक्षा ( Body Safety )

शरीर की सुरक्षा या अर्थ उन सुरक्षाओ से है जिनके द्वारा हम अपने आप को कार्यशाला में कार्य करते समय किसी भी दुर्घटना से बचा सकते है। इसके लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-

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  1. किसी चलती हुई मशीन पर कार्य करते समय उसके पुर्जी जैसे-बेल्ट आदि को न हुए।
  2. यदि किसी मशीन के घूमने वाले पुर्जी पर कवर लगा है तो चलती मशीन में कवर को न हटाएं।
  3. चलती हुई गशीन में तेल व ग्रीस नहीं देना चाहिए।
  4. मशीन पर कार्य करते समय दीले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
  5. कार्यशाला में तेल, पेट्रोल अथवा बिजली से आग लग जाए तो उसे पानी से न बुझाएं, इसके लिए रेत, मिट्टी व आग बुझाने वाली गैस का प्रयोग करें।
  6. ऑटोमोबाइल कार्यशाला में सीजल, पेट्रोल तथा बेक ऑयल का प्रयोग किया जाता है। अतः कार्य करते समय आंखों को इनसे बचाकर रखें क्योंकि ये पदार्थ आंखों के लिए हानिकारक हो सकते है।
  7. कार्यशाला में तेल ग्रीस अथवा लोहे का बुरादा नही मलन चाहिए क्योंकि तेल या प्रीस पर पैर फिनाल सकता है व्यानर आदि का बुरादा पैरों में चुभ सकता है।
  8. बैट्री को उठाते व रखते समय इसके पानी से अपने कपड़ों को बचाकर रखें क्योंकि इसमें तेजाब मिला होता है।
  9. जब बैट्री चार्ज हो रही हो तो उसमें झांकना नहीं चाहिए क्योंकि चार्जिग के समय बैट्री से तेजाब की गैस निकलती है जो हानिकारक होती है।
  10. यदि किसी मोटर गाड़ी में जैक लगाना हो तो उसके अन्य पड़ियों के आगे-पीछे रोक लगानी चाहिए जिससे मोटर गाड़ी आगे-पीछे न खिसके।
  11. मोटर गाड़ी को जैक पर उठाने के बाद उस स्थान के नीचे लकजी के गुटके लगा देने चाहिए जिससे कार्य करते समय जैक रिलप होने अथवा गाड़ी के हिल-जुलकर गिरने का भय न रहे।
  12. कैपिटल वाले औजारों विशेषकर फाइल, सोपर इत्यादि बिना हैण्डिल के प्रयोग न करें, इससे हाथ में चोट लगने का भय रहता है।
  13. ग्राइण्डर पर किसी पुर्जे या औजार की ग्राइण्डिंग करते समय चश्मे का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि घरा समय धातु या ग्राइण्डिंग स्टोन के बारीक कण उछलकर आंखों में चले जाने का भय रहता है।
  14. किसी भी मशीन पर कार्य करने से पहले उस मशीन के बारे में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए अन्यथा गलत तरीके से प्रयोग करने में दुर्घटना हो सकती है।
  15. हाथ से प्रयोग होने वाले औजारों पर तेल या ग्रीस आदि की चिकनाई नहीं होनी चाहिए अन्यथा काम करते समय औजार स्लिप हो सकते है जिससे चोट लग सकती है।

गशीन, औजार एवं उपकरण की सुरक्षा ( Machine, Tool and Instrument Safety )

मशीनों के उत्पादन व उसके किसी भाग को बनाने अमवा उनकी मरम्मत करने के लिए विभिन्न प्रकार की संक्रियाएं करनी पड़ती है जिसके लिए विभिन्न प्रकार के औजार मशीनें काम में ली जाती है औजारों व मशीनों की सुरक्षा का अर्थ उन सावधानियों से है जिनको ध्यान में रखकर कार्य करने से औजारों व मशीनों की सुरक्षा हो सके। इसके लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए-

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  1. चलती हुई मशीन से किसी कारणवश विद्युत आपूर्ति बन्द हो जाती है तो मशीन का स्विच बन्द कर देना चाहिए।
  2. जिन मशीनों व औजारों से कार्य लिया गया है उन्हें कार्य करने के बाद साफ करके यथास्थान रखना चाहिए।
  3. किसी भी घूमती मशीन पर जॉब की नाप नहीं लेनी चाहिए।
  4. किसी भी पार्ट को खोलने-बांधने के लिए निर्धारित औजारों का ही प्रयोग करना चाहिए। जैसे तोकने के लिए स्थौड़े व काटने के लिए नी का प्रयोग करे, स्पैनर अथवा पेचकस का प्रयोग न करे।
  5. कटिंग औजारों जैसे- स्क्रेपर, फाइल, समर इत्यादि को अन्य औजारों से अलग रखें जिससे कटिंग औजारों की धार खराब न ही व अन्य औजारों पर निशान भी न लगे।
  6. फाइलिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाली फाइल पर चिकनाई नहीं होनी चाहिए।
  7. चैनी का प्रयोग करते समय उसके हैड के बीच चोट लगनी चाहिए अन्यथा नी हैड फैल जाएगा।
  8. टैप अथवा डाई का प्रयोग करते समय उचित लुब्रीकेन्ट का प्रयोग करना चाहिए अन्यथा काटने वाले भाग की धार जल्दी खराब हो जाती है।
  9. सूक्ष्म माप वाले उपकरणों का प्रयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए, उनको कटिंग औजारों के साथ कभी नहीं रखना चाहिए।
  10. जिन मशीनों पर कार्य करना है उनका कार्य शुरू करने से पूर्व सही प्रकार से लुब्रीकेशन व सफाई कर लेनी चाहिए।
  11. अगर कोई मशीन मरम्मत करने योग्य हो गई है तो उससे मरम्मत करने के बाद मे ही इस्तेमाल करना चाहिए अन्यथा हो सकता है मशीन ज्यादा खराब हो जाए अथवा कोई दुर्घटना भी हो सकती है।
  12. निर्धारित क्षमता से मशीन को अधिक लोड पर कार्य नहीं करना चाहिए।
  13. चलती हुई गशीन में किसी प्रकार की अनावश्यक आवाज आने लगे तो मशीन को तुरन्त बंद कर देना चाहिए। मशीन की चालू स्थिति में न तो पुर्जी से छेड़छाड़ करनी चाहिए न ही मरम्मत करने की कोशिश करनी चाहिए।
  14. किसी धातु के टुकड़े अथवा पाइप को काटने के लिए हैक्सों का प्रयोग करना है तो उसकी ब्लेड को अधिक टाइट नहीं करना चाहिए टूटने का भय रहता है।
  15. हैक्सों ब्लेड से कटिंग करते समय उचित कूलेन्ट का प्रयोग करना चाहिए अन्यथा ब्लेड के गर्म होने से उसकी कटिंग क्षमता जल्दी ही समाप्त हो जाएगी।

कार्य की सुरक्षा ( Job Safety )

कार्य की सुरक्षा का अर्थ मरम्मत की जाने वाली मशीन तथा उसके भागों की सुरक्षा से है। इसके लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-

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  1. जॉब पर कटिंग करते समय अधिक गहरा कट नहीं लगाना चाहिए।
  2. भारी जॉबजे मशीन पर बांधने के लिए पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
  3. कार्यशाला में तकनीकी कार्य शुरु करने से पूर्व कार्य सम्बन्धित पूरी प्लानिंग करनी चाहिए।
  4. यदि कोई नया पुर्जा तैयार करना है या किसी पुर्जे को टीक करना है तो उसके लिए सबसे पहले उसकी ड्रॉइंग व ऑपरेशन शीट तैयार करनी चाहिए तथा उसी क्रम में कार्य करना चाहिए।
  5. जॉब पर कार्य करते समय निर्धारित मशीनों, औजारों व उपकरणों का ही प्रयोग करे अन्यथा जॉब व मशीन को नुकसान पहुंच सकता है।
  6. कटिंग टूलों का प्रयोग करते समय जॉब की धातु के अनुसार कूलैन्ट अथवा लुबीकेन्ट का प्रयोग करना चाहिए जिससे टूल की धार खराब न हो तथा जॉब की धातु के गुणों में भी विशेष परिवर्तन न हो।
ITI Electrician course Syllabus details in Hindi

कार्यस्थल में 6 प्रकार के खतरे

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  1. शारीरिक जोखिम।
  2. कार्य संगठन के खतरे।
  3. एर्गोनोमिक खतरे।
  4. रासायनिक खतरे।
  5. जैविक खतरे: जैविक खतरों की परिभाषा, जिसे आमतौर पर जैव जोखिम के रूप में जाना जाता है, कोई भी जैविक पदार्थ हो सकता है जो मनुष्यों को नुकसान पहुंचा सकता है।

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