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रीमिंग के बारे में

रीमिंग क्या है?

“पहले से किए गए छिद्र (hole) को बढ़ाकर उचित आकार में लाने की प्रक्रिया को रीमिंग कहते हैं”।
रीमिंग द्वारा किसी भी छिद्र को -0.005 मिमी तक या +0.005 मिमी तक की शुद्धता में फिनिश किया जा सकता है। रीमिंग प्रक्रिया में उपयोग होने वाले रीमर के द्वारा 0.02 मिमी से 0.15 मिमी तक धातु को काटा जाता है। इसे रीमिंग एलाउन्स भी कहा जाता है।

रीमिंग के लिए ड्रिल आकार

हैण्ड रीमर या मशीन रीमर द्वारा रीमिंग करने के लिए ड्रिल (drill) किए गए छिद्र का साइज, रीमर के साइज से छोटा होना चाहिए। इसके अतिरिक्त रीमर द्वारा फिनिशिंग करने से पहले पर्याप्त धातु का होना भी आवश्यक है, क्योंकि कम धातु होने से आवश्यकतानुसार फिनिशिंग (finishing) प्राप्त नही होगी और अधिक धातु होने पर रीमर पर दबाव पड़ेगा, जिससे रीमर खराब हो जाएगा।

(a.)ड्रिल साइज की गणना

किसी दिए गए रीमर साइज का होल तैयार करने के लिए निम्न सूत्र (formula) से ड्रिल का साइज निकाला जाता है।

ड्रिल साइज (drill size) = रीमर का साइज – (रीमर का अण्डरसाइज + ड्रिल का ओवरसाइज)

(b.)परिष्कृति (फिनिश) साइज

रीमर का व्यास परिष्कृति साइज (finish size) कहलाता है।

More Information:- रीमर के प्रकार

(c.)ओवरसाइज

ड्रिल द्वारा होल करने के बाद हमेंं हमेशा कुछ बड़े साइज का होल प्राप्त होता है, इसे ओवरसाइज (Oversize) कहते हैं। होल का साइज ड्रिल के साइज से 0.05 मिमी बड़ा होता है।

(d.)अण्डरसाइज

किसी विशेष साइज का रीमर होल प्राप्त करने के लिए उपयुक्त ड्रिल के साइज का चुनाव किया जाता है। यह साइज रीमर के छोटे साइज से भी कुछ कम रहता है। इसे अण्डरसाइज (Undersize) कहते हैं।
हल्की धातुओं के लिए अण्डरसाइज को 50% बड़ा किया जाता है।

उदाहरण 1. एक माइल्ड स्टील (mield steel) में बने छिद्र की 20 मिमी के रीमर से रीमिंग की जाती है। इस छिद्र को बनाने के लिए ड्रिल साइज ज्ञात कीजिए।
हल:-
रीमर का साइज= 20 मिमी
अण्डरसाइज (लिस्ट के अनुसार)= 0.3 मिमी
ओवरसाइज= 0.05 मिमी
ड्रिल का साइज= रीमर का साइज – (अण्डरसाइज + ओवरसाइज)
= 20 – (0.3 + 0.05)
ड्रिल का साइज= 19.65 मिमी

रीमिंग करने की विधि

वर्कशॉप में उपलब्ध उपकरणों के आधार पर या फिनिशिंग की आवश्यकता को देखते हुए रीमिंग के प्रकार को चुना (choose) जाता है। यदि कम व्यास का व अधिक गहरी रीमिंग करनी हो, तो फ्लूटिड मशीन रीमर का उपयोग (use) किया जाता है, परन्तु यदि बहुत अधिक फिनिशिंग की आवश्यकता है, तो हैण्ड रीमर का ही उपयोग किया जाता है। रीमिंग (reaming) करने के लिए होल का साइज कुछ कम रखा जाता है। रीमर द्वारा फिनिशिंग के लिए आवश्यक धातु होल में रहनी चाहिए।

(a.)हाथ द्वारा रीमिंग

  1. सबसे पहले जाब को वाइस (vice) या फिक्स्चर (fixture) में पकड़ लें।
  2. इसके बाद छिद्र का साइज चेक करें। कि यह रीमर (reamer) के साइज से 3% से अधिक छोटा नहीं होना चाहिए।
  3. इसके बाद रीमर को छिद्र में रखकर उसकी लम्बवत् स्थिति को चेक करें। रीमर एवं छिद्र संकेन्द्रित (centre) होने चाहिए।
  4. रीमर को हल्के दबाव (pressure) के साथ क्लॉकवाइज घुमाएँ।
  5. रीमर को घुमाते समय छिद्र में उचित स्नेहन (lubrication) को डालते रहें।
  6. रीमिंग प्रक्रिया (reaming process) पूरी हो जाने के बाद रीमर को क्लॉकवाइज दिशा में ही घुमाकर बाहर निकालें।
  7. इसके बाद जॉब (job) और रीमर को साफ (clean) करके उचित स्थान पर रख दें।

(b.)मशीन द्वारा रीमिंग

  1. सबसे पहले जॉब को मशीन बैड (machine bed) पर या फिक्स्चर में सही प्रकार से क्लैम्प करें।
  2. मशीन (machine) के स्पिण्डल में उचित साइज का रीमर ठीक से फिट करें।
  3. रीमिंग करने से पहले ही होल में तथा स्पिण्डल पर मोबिल ऑयल (Mobil oil) लगाएँ। तथा हैण्डिल को बहुत ही सावधानी के साथ धीरे-धीरे नीचे लाएँ।
  4. रीमिंग की स्पीड ड्रिलिंग (drilling) की तुलना में बहुत कम रखें, इससे रीमर जल्दी गर्म नहीं होगा।
  5. कार्य पूरा (work complete) हो जाने पर रीमर को चलते हुए ही बाहर निकाल कर उसे साफ करके उचित स्थान पर रख दें।
  6. मास प्रोडक्शन के लिए पायलट रीमर (pilot reamer) का उपयोग करना चाहिए।

रीमिंग करते समय सावधानियाँ

  1. रीमिंग करते समय क्षतिग्रस्त रीमर क्षतिग्रस्त रीमर (Damaged reamer) का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके प्रयोग से छिद्र अण्डरसाइज हो जाएगा।
  2. रीमिंग से पहले रीमर को अच्छे से जाँच (check) लेना चाहिए।
  3. रीमर को घुमाते समय उस पर अत्यधिक दबाव (Extreme pressure)नहीं डालना चाहिए।
  4. रीमर को ड्रिल किए गए छिद्र में सावधानीपूर्वक (carefully) धीरे-धीरे आगे बढ़ाना चाहिए।
  5. संक्रिया (process) करते समय स्नेहक का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
  6. संक्रिया में बनी धातु छीलन (Metal shavings) को समय-समय पर हटाते रहना चाहिए।
  7. रीमर की अक्ष व छिद्र की अक्ष (axis) एक ही सीध में होनी चाहिए।
  8. रीमर को एण्टी – क्लॉकवाइज (anticlockwise) कभी नहीं चलाना चाहिए।
  9. रीमर को ग्राइण्ड करने के बाद ऑयल स्टोन (oil stone) पर फिनिशिंग करनी चाहिए।

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