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रेताई के बारे में

रेताई क्या है?

“किसी कार्यखण्ड (workpiece) से अतिरिक्त पदार्थ (extra material) को रेती द्वारा रगड़कर अलग करने की प्रक्रिया को रेताई (filing) कहते हैं”।
रेताई करने के लिए छोटे जॉबों (jobs) को वाइस (vice) में पकड़ा जाता है। और बड़े व भारी जॉब को बिना पकड़े हुए ही फाइलिंग की जा सकती है।

सही रेताई करने के लिए निम्न काम करें

  1. सबसे पहले जॉब पर मार्किंग करनी चाहिए।
  2. जॉब को आकृति (shape) व आकार (size) के अनुसार ही वाइस या फिक्स्चर में पकड़ने की व्यवस्था करें। यदि जॉब को वाइस में पकड़ा गया है तो 3 मिमी से कम और 5 मिमी से अधिक जॉब वाइस (vice) से बाहर नहीं रहना चाहिए तथा जॉब कोहनी की ऊँचाई (height) तक रहना चाहिए।
  3. जॉब की धातु व आकार (size) के अनुसार ही रेती को चुनें (select)।
  4. रेताई (फाइलिंग) शुरु करने से पहले जॉब (job) के सामने, रेतने की दिशा में खड़े होना चाहिए। बायाँ पैर (left leg) आगे तथा दायाँ पैर पीछे रखना चाहिए। और दोनों पैरों के बीच में लगभग 30 सेमी का अन्तर रहना चाहिए।
  5. फाइलिंग करते समय रेती को हैण्डिल से दाएँ हाथ (right hand) से पकड़ना चाहिए तथा जॉब पर एक समान दाब डालने के लिए रेती के आगे वाले सिरे को बाएँ हाथ की अँगुलियों (fingers) से दबाना चाहिए। और साथ ही दाएँ हाथ की हथेली (palm) से रेती को आगे धकेलना चाहिए।
  6. रेती को जॉब के एक सिरे से चलाकर दूसरे सिरे तक ले जाना चाहिए। इससे समतल सतह (plane surface) प्राप्त होती है।
  7. रेती को आगे ले जाते समय ही दबाव डालना चाहिए क्योंकि यह फॉरवर्ड स्ट्रोक (forward stroke) में ही धातु को काटती है। और रेती को पीछे लाते समय बिना दबाव के इसे वापस लाया जाता है।

More Information:- रेतियों के बारे में

रेताई करने की विधियाँ
या
रेताई कितने प्रकार की होती है?

(1.)सीधी रेताई (Straight Filing)

“जब वाइस की अक्ष के समान्तर रेती को चलाकर रेताई की जाती है तो उसे सीधी रेताई (straight filing) कहते हैं”।
इस विधि में फाइलिंग एक सिरे से दूसरे सिरे तक की जाती है। इसमें रेती को बैलेन्स करके सीधा रखते हुए आगे-पीछे चलाया जाता है। इस विधि में धातु अधिक कटती है, लेकिन चैटरिंग (chattering) आने की सम्भावना अधिक रहती है।

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(2.)क्रॉस रेताई (Cross Filing)

इसमें रेती को वाइस की अक्ष से 45° पर चलाकर फाइलिंग की जाती है। इसको डायगोनल रेताई (diagonal filing) भी कहते हैं। यह फाइलिंग विकर्ण के एक कोने से शुरु की जाती है, इसके बाद बाईं (left) ओर 45° पर रेताई (फाइलिंग) की जाती है।
इस प्रकार एक के बाद दूसरी बार फाइलिंग करने पर आपस में क्रॉस हो जाती है। इसीलिए इसे क्रॉस रेताई (cross filing) कहते हैं। इस प्रकार से फाइलिंंग करने पर चैटरिंग (chattering) होने की सम्भावना कम होती है तथा सतह अधिक समतल बनती है।

(3.) ड्रॉ रेताई (Draw Filing)

इस विधि में रेती को दोनों हाथों में कसकर पकड़ते हैं तथा वाइस (vice) के सामने में खड़े होकर रेती को जॉब की सतह पर रगड़ते हुए आगे-पीछे चलाते हैं।
इस प्रक्रिया (process) में कम धातु कटती है। ड्रॉ फाइलिंग जॉब की सतह पर बीच में आए उठान (उभार) को फाइलिंग करने के लिए की जाती है। रफ फाइलिंग के कारण सतह पर बनी खरोंचों (scratches) को दूर करके अच्छी परिष्कृत सतह पाने के लिए भी ड्रॉ फाइलिंग (draw filing) की जाती है।

(4.)कर्व्ड रेताई (Curved Filing)

कर्व्ड सतह पर फाइलिंग, फ्लैट रेती (flat file) द्वारा ही की जाती है। इसमें रेती को फॉरवर्ड स्ट्रोक में आगे ले जाते समय हैण्डिल वाले भाग को नीचे से ऊपर उठाते जाते हैं, जिससे पूरी कर्व्ड सतह पर रेती रगड़ती हुई आगे जाती है।

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