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वेल्डिंग के प्रकार

आजकल वेल्डिंग का इस्तेमाल अधिकतर किया जाने लगा है, चाहें छोटा प्रोजेक्ट या बड़ा प्रोजेक्ट बनाया जा रहा हो तो इन प्रोजेक्ट में किसी न किसी स्थान पर स्थायी बंधक की आवश्यकता होती है। तब स्थायी बंधक के रूप में वेल्डिंग का इस्तेमाल किया जाता है। (Welding ke prakar in hindi)

दोस्तों, मैंने इस पोस्ट में वेल्डिंग कितने प्रकार की होती हैं? (Welding there are many types) और किस वेल्डिंग का उपयोग किस स्थान पर किया जाता है। आदि के बारे में पूरी जानकारी दी है। इसको पूरा जरूर पढ़ें।

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वेल्डिंग के प्रकार

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1.धातु के आधार पर

वेल्डिंग, जॉब या जोड़ी जाने वाली धातु के आधार पर दो प्रकार की होती है, जिसके बारे में नीचे समझाया है-

1.समांगी वेल्डिंग

इस प्रकार की वेल्डिंग में दो भागों को उसी धातु की फिलर रॉड की सहायता से या सहायता के बिना जोड़ा जाता है। जैसे- माइल्ड स्टील को माइल्ड स्टील के द्वारा जोड़ना। फोर्ज वेल्डिंग, गैस वेल्डिंग, आर्क वेल्डिंग आदि प्रोसेस समांगी वेल्डिंग के अंतर्गत आती हैं।

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2.विषमांगी वेल्डिंग

इस प्रकार की वेल्डिंग में दो अलग-अलग धातु के भागों को फिलर रॉड की सहायता से या बिना सहायता के जोड़ा जाता है। इसमें फिलर रॉड का मेल्टिंग प्वॉइण्ट जोड़ी जाने वाली धातु से कम रहता है। जैसे- माइल्ड स्टील को कास्ट आयरन के साथ जोड़ना। सोल्डरिंग, ब्रेजिंग प्रक्रियाएं विषमांगी वेल्डिंग के अंतर्गत आती है।

2.दाब के आधार पर

वेल्डिंग, करने के लिए लगाए गए दाब के आधार पर निम्न दो प्रकार की होती है-

1.दाब वेल्डिंग (Pressure Welding)

इस प्रकार की वेल्डिंग में फिलर मैटीरियल, निष्क्रिय गैस आदि का उपयोग नहीं किया जाता है। और इसमें जोड़ी जाने वाली धातु भी द्रव अवस्था में लाई जाती है। इस वेल्डिंग में सिर्फ दाब देकर धातुओं या जॉबों को जोड़ा जाता है।

दाब वेल्डिंग के प्रकार

यह दो प्रकार की होती है-

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(i)फोर्ज वेल्डिंग

यह विधि धातुओं को जोड़ने की सबसे पुरानी विधि है, इसमें सबसे पहले धातुओं या जॉबों के जोड़े वाले भाग को भट्ठी में प्लास्टिक अवस्था तक गर्म किया जाता है। इसके बाद दोनों भागों को आपस में रखकर हथौड़े से चोट मारी जाती है। जिससे धातु जुड़ जाती है। इस प्रकार की वेल्डिंग के द्वारा T-जोड़, V-जोड़, लैप जोड़, बट जोड़, किनारे का जोड़ आदि बनाए जाते हैं।

(ii)प्रतिरोध वेल्डिंग

इस प्रकार की वेल्डिंग में सबसे पहले जोड़ी जाने वाली धातुओं में ट्रांसफार्मर की सहायता से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है। और जिस भाग को जोड़ना होता है, वहां पर प्रतिरोध उत्पन्न कराया जाता है। जिसके कारण वह भाग गर्म होने लगता है। जब जोड़ा जाने वाला भाग प्लास्टिक अवस्था तक गर्म हो जाता है। इसके बाद जोड़ी जाने वाली धातुओं पर दाब डालकर जोड़ दिया जाता है। इस वेल्डिंग का उपयोग वायुरोधी, वाष्परोधी, गैसरोधी तथा जलरोधी जोड़ बनाने के लिए किया जाता है।

प्रतिरोध वेल्डिंग के प्रकार

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  • सीम वेल्डिंग
  • स्पॉट वेल्डिंग
  • बट वेल्डिंग
  • फ्लैश वेल्डिंग
  • प्रोजेक्शन वेल्डिंग
  • पर्कुजन वेल्डिंग

(a)सीम वेल्डिंग

इस वेल्डिंग का उपयोग बिना लीकेज वाली वस्तु बनाने के लिए किया जाता है। जैसे- गैस सिलेण्डर, पेट्रोल टैंक आदि। इसका दूसरा नाम Continuous spot welding या Roller spot welding है।

(b)स्पॉट वेल्डिंग

यह वेल्डिंग दाब वेल्डिंग है, इसमें इलेक्ट्रोड ताँबा का बना होता है। यह वेल्डिंग विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर कार्य करता है।

नोट:- बट वेल्डिंग,फ्लैश वेल्डिंग,प्रोजेक्शन वेल्डिंग तथा पर्कुजन वेल्डिंग आदि का बहुत कम उपयोग किया जाता है।

2.विखण्डन वेल्डिंग/दाबरहित वेल्डिंग

इस वेल्डिंग में धातुओं को दाब देने की आवश्यकता नहीं होती है, इसमें सबसे धातुओं को आपस में रखकर ऊष्मा प्रवाहित कराई जाती है। इस ऊष्मा के द्वारा धातुओं को पिघलने तक गर्म किया जाता है। इसमें धातुओं को गर्म करने के लिए विद्युत या ऑक्सी एसीटिलीन का उपयोग किया जाता है। जब यह धातु पिघल जाती है, तो यह धातुएं आपस में मिलकर मिश्रण बनाती हैं, इसके बाद जब धातु ठण्डी हो जाती है, तब मजबूत जोड़ बन जाता है।

विखण्डन वेल्डिंग/दाबरहित वेल्डिंग के प्रकार

यह मुख्यत: तीन प्रकार की होती हैं-

(i)गैस वेल्डिंग

इस वेल्डिंग में तापमान उत्पन्न करने के लिए ऑक्सीजन गैस तथा ईंधन गैस को उपयोग में लाया जाता है। इसमें भी तापमान के द्वारा जोड़े वाले स्थान को पिघलाया जाता है। जिससे यह पिघली धातु ठण्डी होकरे मजबूत जोड़ बनाती है।

(ii)विद्युत आर्क वेल्डिंग

इसमें जोड़ी जाने वाली धातुओं को तापमान विद्युत की सहायता से दिया जाता है। और धातुओं को गैस के दबाव द्वारा विद्युत प्रवाहित की जाती है। जिससे आर्क का टम्प्रेचर 3400°C तक पहुंच जाता है। इससे धातु की आर्क पिघलकर जोड़ने वाले स्थान पर भर जाती है। और ठण्डा होने पर जोड़ बन जाता है।

(iii)थर्मिट वेल्डिंग

इस वेल्डिंग का उपयोग लोकोमोटिव इंजन, रेल की पटरी, भारी मशीनों आदि में बड़े जोड़ बनाने में किया जाता है। इस वेल्डिंग में थर्मिट पाउडर का उपयोग किया जाता है। यह पाउडर एल्युमीनियम पाउडर, मैटल ऑक्साइड के मिश्रण से बनाया जाता है।

दोस्तों, यदि आपको वेल्डिंग के प्रकार पोस्ट अच्छी लगी हो तो कमेंट व शेयर अवश्य करें।

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