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फेज क्या है in Hindi सिंगल फेज व थ्री फेज में अंतर

दोस्तों, आज की पोस्ट में फेज क्या है in Hindi सिंगल फेज और थ्री फेज में क्या अंतर है? इत्यादि के बारे में बताया है, यदि आप जानकारी पाना चाहते हो तो पोस्ट को पूरा पढ़ें।

फेज क्या है in Hindi

किसी स्थान पर करंट (current) के जाने के लिए जिस तार का उपयोग किया जाता है, अर्थात् जब करंट एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है, उसे फेज (Phase) कहते हैं और करंट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाने के लिए जिस माध्यम तार का उपयोग करते हैं, उसे फेज तार (Phase Wire) कहते हैं।

phase kya hai
Phase kya hai

यह तार हमेशा लाल रंग (Red Colour) का रखा जाता है, ताकि किसी भी बिजली मिस्त्री को फेज तार (Phase Wire) के बारे में कन्फ्यूजन न हो।

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सिंगल फेज और थ्री फेज में क्या अंतर होता है?

दोस्तों, हमारे घरों में आने वाली सप्लाई सिंगल फेज (Single Phase) की होती है क्योंकि हमारे घर में इतने बड़े उपकरण नहीं होते। जिनको चलाने के लिए कि थ्री फेज (Three Phase) की सप्लाई की जरूरत पड़ेगी।

थ्री फेज की सप्लाई (Three Phase) की आवश्यकता बड़े-बड़े उद्योगों में पड़ती है। जहां पर बड़ी-बड़ी मोटर और ऐसे उपकरण (device) चलाएं जाते हैं जिन्हें चलने के लिए बहुत अधिक पावर या करंट (High Power or current) की आवश्यकता होती है।

हमारे घर (Home) जो मोटर लगी होती है वह 0.5 Hp या 1 HP तक की होती है जो कि सिंगल फेज से आसानी से चल सकती है। लेकिन अगर हमें कहीं पर 5 HP की मोटर चलानी है तो इसके लिए हमें तीन फेज की सप्लाई (Supply of three phase) की आवश्यकता पड़ेगी। क्योंकि हम सब जानते हैं मोटर जब स्टार्ट होती है तो उसे बहुत अधिक पावर (High Power की जरुरत होती है। इसीलिए अधिक बड़े मोटर के लिए तीन फेज की सप्लाई की आवश्यकता होती है।

1.सिंगल फेज की सप्लाई (Single Phase ke Supply)

सिंगल फेज (Single Phase) की सप्लाई में 90⁰ और 270⁰ पर वोल्टेज में पीक आता है। सिंगल फेज के इलेक्ट्रिसिटी जनरेटर में एक क्वॉयल (Coil) होती है, जिससे सिर्फ एक फेज (Phase) बनाया जा सकता है। लेकिन जनरेटर में जब क्वॉयल घूमती है, तब क्वॉयल के दोनों टर्मिनल (Terminal) पर AC सप्लाई जनरेट (Generat) होती है। लेकिन बहुत से लोगों को यह AC सप्लाई साइन वेब (Sine Wave) में क्यों होती।

AC सप्लाई की तारों (Wires) में DC सप्लाई की तरह एक फिक्स सप्लाई (Fix supply) नहीं होती है, जैसे कि अगर ऐसी सप्लाई में एक टर्मिनल Positive है तो दूसरा टर्मिनल Negitive होगा। लेकिन ऐसी सप्लाई में हमें दोनों टर्मिनल पर पॉजिटिव और नेगेटिव सप्लाई मिलती है। जिसे हम रेक्टिफायर (Rectifier) की मदद से डीसी में बदल सकते हैं

2.थ्री फेज की सप्लाई (Three Phase ke Supply)

तीन फेज (Three Phase) की सप्लाई में इलेक्ट्रिक जनरेटर के अंदर तीन क्वॉयल (Three Coil) लगाई जाती है और यह क्वॉयल एक दूसरे से 120° के कोण पर लगाई जाती है ताकि जब सिंगल फेज पीक (Single Phase peak) हो तो दूसरा पीक पर न हो।

जब क्वॉयल (Coil) एक दूसरे से 120° के कोण पर सेट की जाती है तो उससे बनने वाली AC सप्लाई की फ्रीक्वेंसी (Frequency) में भी 120° का अंतर देखने को मिलेगा।
जब पहला पेज पीक वोल्टेज पर होगा तो वह 120° पर होगा और ठीक पहले फेज के बाद में दूसरा फेस जब पीक वोल्टेज पर होगा तो वह पहले फेज से 120° के बाद होगा और ऐसे ही तीसरा फेज 120° पर पीक वोल्टेज पर होगा।

दोस्तों, यदि आपको फेज क्या है in Hindi? सिंगल फेज व थ्री फेज में अंतर पोस्ट अच्छी लगी हो तो कमेंट करके बताएं और हमसे जुड़ने के लिए टेलीग्राम चैनल को ज्वाइन करें।

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