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चादरों के बारे में

धातु की चादरों की मोटाई को स्टैण्डर्ड वायर गेज (standard wire gauge) के नम्बर द्वारा मापा जाता है। यह नम्बर जितना कम होगा चादर (sheet) उतनी ही अधिक मोटी होगी। और यह नम्बर जितना अधिक होगा चादर उतनी ही अधिक पतली होगी।

चादर के प्रकार

शीट मैटल शॉप (sheet metal Shop) में प्रयोग होने वाली चादर निम्न प्रकार हैं-

Metal sheets

1.लोहे की चादरें

यह चादरें (sheets) शीट मैटल शॉप में सबसे अधिक प्रयोग (use) होती हैं। यह निम्न तीन प्रकार की होती हैं-

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(i)काली लोहे की चादरें

पिटवाँ लोहे (wrought iron) की बनी कोरी (अलेपित) चादरें, लोहे की काली चादर के नाम से जानी जाती हैं। यह संक्षारण अवरोधी नहीं होती है, इसलिए इन पर जंग लग जाता है, जिसके कारण इनका रंग (colour) भूरा-काला हो जाता है। और जंग लगने के दोष के कारण इस चादर से बने उत्पाद पर पेन्ट करना आवश्यक हो जाता है। यह चादरें मुलायम, तन्य तथा आघातवर्धनीय (malleability) होती हैं। इसकी चादरों को उपयोग करने से पहले नरम किया जाता है क्योंकि यह मोड़ने पर टूट सकती है।
इनका उपयोग टंकियाँ, बाल्टियाँ, पाइप आदि बनाने के लिए किया जाता है। और यह चादरें 1.0 मी अथवा 1.2 मी चौड़ाई के रोल्स के रूप में मिलती हैं, जिन्हें आवश्यकता के अनुसार 2मी, 2.5मी अथवा 3 मी लम्बाई में काट लिया जाता है।

(ii)जस्ती लोहे की चादरें

यह भी एक लोहे की चादर होती है। काली लोहे की चादर को जंगरोधी बनाने के लिए उसको पिघले हुए जस्ते (zinc) में डुबोकर उस पर जिंक की एक पतली परत चढ़ा दी जाती है । इस जिंक की परत चढ़ी हुई शीट को गैल्वेनाइज्ड आयरन शीट या जस्ती लोहे की शीट कहते हैं। जिंक की कोटिंग (coating) करने से इन चादरों पर जंग (rust) नहीं लगता है। और इन चादरों के ऊपर आसानी से सोल्डरिंग की जा सकती है। इनका उपयोग पानी की टंकी, अनाज रखने की टंकी, बक्से, बसों की बॉडी (body of buses) आदि बनाने के लिए किया जाता है।

(iii)टिन लेपित चादरें

जिंक (zinc) के समान, लोहे की चादरों (sheets of iron) पर टिन धातु का लेप भी किया जाता है। यह टिन लेपित लोहे की चादरें अधिक चमकने वाली तथा सपाट होती हैं। इनका उपयोग खाद्य वस्तुएँ (food items) रखने तथा खाद्य तेलों को भरने के लिए डिब्बे बनाने में किया जाता है।
Note:- धातु चादरों पर कलई (टिन) की परत चढ़ाने की प्रक्रिया टिनिंग कहलाती है।

2.ताँबे की चादरें

यह चादरें, लोहे की चादरों की तुलना में अधिक आघातवर्धनीय (malleability) होती हैं। और इसमें लचक अधिक होती है। इन्हें आसानी से किसी भी आकार में मोड़ा जा सकता है। और यह ऊष्मा तथा विद्युत (heat and electric) की सुचालक होती हैं। इसलिए इनका उपयोग बिजली के सामान, गीजर, पाइप, रेडियेटर आदि को बनाने में अधिक होता है।
यह चादरें 1.2 मी x 1.2 मी (4 ‘ x 4’) अथवा 1.2 मी x 0.60 मी (4 ‘ x 2 ‘) की आकार की बाजार में उपलब्ध हैं।

3.पीतल की चादरें

यह ताँबे तथा जिंक का अलॉय (alloy) होता है। और इसकी चादरें, ताँबे की चादरों की तुलना में अधिक कठोर व सस्ती होती हैं। पीतल पर भी वायुमण्डल का प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए इनका उपयोग (use) बर्तन बनाने, वाल्व की कैप बनाने व हाइड्रॉलिक वाल्व बनाने में अधिक किया जाता है।

4.एल्युमीनियम की चादरें

यह चादरें हल्की, मुलायम, मजबूत, संक्षारण – रोधी, सस्ती तथा ऊष्मा और विद्युत (heat and electric) की अच्छी सुचालक होती हैं। इसका उपयोग सस्ते घरेलू बर्तन बनाने में किया जाता है। और इसके कुछ अलॉय (alloy) की चादरें बहुत अधिक सामर्थ्यवान होती है, इसलिए इनका उपयोग हवाई जहाज की बॉडी बनाने में किया जाता है।

5.स्टैनलैस स्टील की चादरें

क्रोमियम मिली हुई स्टील की चादरें बहुत अधिक सामर्थ्यवान, आघातवर्धनीय तथा संक्षारण-रोधी होती हैं। यह चादर G. I. (जस्ता लोहा) चादरों (sheets) की अपेक्षा अधिक कठोर होती हैं। और इस पर वातावरण तथा हल्के अम्ल और क्षारों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। और इसकी चादरों का उपयोग बर्तन बनाने तथा अस्पतालों (hospitals) में प्रयोग होने वाले औजार बनाने में अधिक होता है।

6.सीसे की चादरें

इसकी चादरें बहुत अधिक लचीली (flexible) होती हैं। इसकी बनी हुई चादरों पर तेजाब का प्रभाव नहीं होता है, इसलिए इसका उपयोग लोहे के टैंकों के अन्दर सीसे की लाइनिंग करने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसकी चादरों का उपयोग तेजाब के टैंक बनाने में व फ्लश पाइप (flush pipe) को बनाने में भी किया जाता है।

More Information:- सीम तथा ग्रूवर के बारे में

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