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लैपिंग टूल कितने प्रकार के होते हैं?

दोस्तों, आज की इस पोस्ट के माध्यम से आपको लैपिंग टूल के प्रकार के बारे में जानकारी दी जाएगी। लैपिंग करने में किस प्रकार के टूल का उपयोग, किस स्थान पर सुगम होगा। इसके अतिरिक्त किस स्थान पर किस तरह के लैपिंग टूल का उपयोग करना चाहिए। आपने लैपिंग का नाम तो सुना होगा। यदि आप पहली बार इसका नाम सुन रहे हो तो आपको लैपिंग व लैपिंग टूल के बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं होगी। यहां पर हम संक्षिप्त में लैपिंग के बारे में चर्चा कर लेते हैं।

Lapping Tool kise kehte hai
Lapping Tool

लैपिंग एक फिनिशिंग प्रोसेस का नाम है। इस प्रोसेस के द्वारा धातु से बहुत कम मात्रा में धातु का कर्तन किया जाता है। इससे धातु या जॉब पर एक अच्छी फिनिशिंग प्राप्त होती है। इस प्रोसेस का उपयोग उन जॉबों पर किया जाता है। जिस पर ग्राइंडिंग की गई होती है या इसी तरह के अन्य प्रोसेस भी किए हुए रहते हैं। लैपिंग के माध्यम से जॉब को पहले से ग्राइंडिंग की गई सर्फेस को फिनिश व शुद्ध साइज में बनाने के लिए किया जाता है।

लैपिंग टूल के प्रकार | Lapping Tool ke Prakar

इस टूल को दो प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है, जो कि निम्न प्रकार से हैं-

  1. लैप के आकार के आधार पर
  2. लैपिंग प्रक्रम के आधार पर

लैप के आकार के आधार पर

यह टूल काम के आधार पर अलग-अलग आकार या साइज के बनाए जाते हैं। यह चार प्रकार के होते हैं, जो कि निम्न प्रकार से हैं-

  1. फ्लैट लैप- इसका प्रकार के लैप का उपयोग चपटी सतह / फ्लैट सर्फेस की लैपिंग करने में किया जाता है। यह ग्रे कास्ट आयरन ( Grey cast iron ) के बने होते हैं।
  2. बेलनाकार लैप- इस प्रकार के लैप का उपयोग रिंग गेजों व आन्तरिक होल की लैपिंग करने में किया जाता है। यह बेलन या सिलेंडर की आकृति के बने होते हैं। इसके सिरों पर स्क्रू भी फिट रहते हैं। इसमें तीन या चार स्लॉट भी कटे होते हैं। जब सिरों पर लगे स्क्रू को कसा जाता है तब लैप फैलते हैं।
  3. रिंग लैप- इस प्रकार के लैप की आकृति डाई हैंडिल के समान होती है। इसका हैंडिल लोहे ( Iron ) का बना होता है। इस हैण्डिल में लैपिंग पदार्थ का बुश व एक एडजस्टिंग स्क्रू लगा होता है। इन स्क्रु की मदद से लैप को घटाया या बढ़ाया जा सकता है।
  4. फ्लोटिड या स्प्रिंग लोडिड लैप- इनका उपयोग बड़े व्यास के सिलेंडर या गेजों की लैपिंग के लिए किया जाता है।

लैपिंग प्रक्रम के आधार पर

इसके आधार पर यह दो प्रकार के होते हैं, जो कि निम्न तरह से हैं-

  1. आन्तरिक लैपिंग टूल- इसका उपयोग आन्तरिक बेलनाकार सर्फेस या होल की लैपिंग करने में किया जाता है। इस प्रकार के टूल एडजस्टेबल या ठोस प्रकार के होते हैं। छोटे आकार के आन्तरिक लैप पीतल व तांबा और बड़े आकार के कास्ट आयरन ( Cast Iron ) के बने होते हैं। इन टूलों की स्लीव तांबे की बनी होती है, जिसको आसानी से बदला जा सकता है। इसके बाहरी सर्फेस पर खांचे या ग्रूव कटे होते हैं, जिससे एब्रेसिव कम्पाउण्ड को ठहराया जाता है और इसमें स्प्लिट का काम आकार को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इस टूल से लैपिंग करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि लैप टूल होल से बाहर न निकले तथा इसे हमेशा दक्षिणावर्त दिशा में घुमाया जाना चाहिए।
  2. बाहरी लैपिंग टूल- इसका उपयोग बाहरी सर्फेस की लैपिंग करने में किया जाता है। यह अनेकों प्रकार के होते हैं; जैसे- फ्लैट लैप, स्प्रिंग लोडिड लैप और रिंग लैप। एडजस्टेबल रिंग लैप की बॉडी में खांचा कटा होता है जिसके कारण इसके आकार को एडजस्ट किया जा सकता है। रिंग लैपिंग को हाथ द्वारा भी किया जा सकता है। इसमें जॉब को वाइस में पकड़ करके लैपिंग करते हैं, जबकि रिंग लैपिंग प्रोसेस को लेथ मशीन ( Lathe Machine ) पर जॉब को बांधकर भी की जाती है। इसके लिए लैप को‌ गोलाई व आगे-पीछे में चलाना चाहिए। जब बड़े व्यास के जॉब की लैपिंग करनी होती है तब एक विशेष प्रकार के टूल का उपयोग किया जाता है, उस टूल की बॉडी लकड़ी की बनी होती है। ये लैपिंग कम्पाउण्ड को फीड करते हैं और इससे इसका आकार एडजस्ट किया जाता है। कुछ रिंग लैप इंटरचेंजेबल बुश वाले भी होते हैं।

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