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चालक, कुचालक व अर्द्धचालक में अंतर

दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको चालक को चालक और अर्धचालक के बीच में क्या अंतर है इसके बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं तो इस लेख को शुरू से लेकर लास्ट तक जरूर पड़े तो चले दोस्तों शुरू करते हैं।

चालक, कुचालक व अर्द्धचालक में अंतर को सारणी में निम्नवत समझाया गया है-

क्रं.
सं.
पैरामीटर
(Parameter)
चालक
(Conductor)
कुचालक
(Insulator)
अर्द्धचालक
(Semiconductor)
1.वर्जित ऊर्जा अंतराल नहीं6 eV से अधिकलगभग 1 eV
2.चालकता उच्च निम्न मध्यम
3.प्रतिरोधकता निम्न उच्च मध्यम
4.प्रतिरोध का ताप नियतांक धनात्मक ऋणात्मक ऋणात्मक
5.प्रतिरोध पर ताप का प्रभाव ताप के साथ
प्रतिरोध बढ़ता है।
ताप के साथ
प्रतिरोध घटता है।
ताप के साथ
प्रतिरोध घटता है।
6.मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत अधिक बहुत कममध्यम
7.उदाहरण तांबा, सिल्वर कार्बन, रबड़जर्मेनियम, सिलिकॉन
8.अनुप्रयोग तारों, केबलों आदि में।मशीनों, संधारित्र
आदि में
डायोड, ट्रांजिस्टर आदि में।
चालक, कुचालक व अर्द्धचालक में अंतर
चालक, कुचालक व अर्द्धचालक में अंतर

चालक वे सामग्री हैं जो आसानी से उनके माध्यम से विद्युत प्रवाह के प्रवाह की अनुमति देते हैं।

अर्धचालक वे पदार्थ होते हैं जिनकी चालकता कंडक्टर और इन्सुलेटर के बीच होती है।

इंसुलेटर बिजली के कुचालक होते हैं या वे अपने माध्यम से विद्युत प्रवाह का संचालन नहीं करते हैं।

इस प्रकार चालक विद्युत का सुचालक होता है। एक अर्धचालक बहुत कम आवेश वाले कणों को संयोजकता बैंड से चालन बैंड में जाने देता है। इंसुलेटर में, विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में आवेशित कणों का प्रवाह नहीं होता है इसलिए इंसुलेटर बिजली के कुचालक होते हैं।

कंडक्टर इलेक्ट्रॉनों के मुक्त संचलन के माध्यम से चार्ज ट्रांसफर की अनुमति देते हैं। कंडक्टरों के विपरीत, इंसुलेटर ऐसे पदार्थ होते हैं जो परमाणु से परमाणु और अणु से अणु तक इलेक्ट्रॉनों के मुक्त प्रवाह को बाधित करते हैं।

दोस्तों अगर आप आईटीआई से संबंधित जुड़े कोई भी सवाल या सुझाव हो तो हमें कमेंट में जरूर बताएं।

2 thoughts on “चालक, कुचालक व अर्द्धचालक में अंतर

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