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केबल किसे कहते हैं? | भाग | प्रकार

एक विद्युत केबल ( Cable ) एक या एक से अधिक तारों की अगल-बगल या बंडल की एक असेंबली होती है, जिसका उपयोग विद्युत प्रवाह को ले जाने के लिए किया जाता है। एक केबल असेंबली एक या एक से अधिक विद्युत केबलों और उनके संबंधित कनेक्टर्स की संरचना है।

केबल क्या है? | Cable kya hai?

एक ऐसा अचालक आवरण युक्त तार, जिसमें एक या एक से अधिक तार ऐंठे होते हैं। केबल ( Cable ) कहलाता है। केबलों के चालक पर रोंधन स्तर की मोटाई वोल्टेज ( Voltage ) पर निर्भर करती है।

Cable kya hai
Cable

एक इंसुलेशन के अंतर्गत आने वाले संपूर्ण चालक में जितने अलग-अलग इंसुलेशन होंगे उतने ही कोर की केबल कहलाती है। एक विद्युतरोधी केबल में, क्षरण धारा क्रोड के साथ-साथ अक्षत: प्रभावित होती है और उपयोगी धारा क्रोड से आच्छद तक त्रिज्यत: प्रवाहित होती है।

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केबल के भाग | Cable ke bhaag

इसके भाग निम्न प्रकार से हैं-

  1. इन्सुलेशन ( Insulation )- यह केबल का भाग होता है। किसी भी चालक को इन्सुलेट करने के लिए वल्केनाइज्ड रबड़, पेपर, वार्निश, फैब्रिक, प्लास्टिक फैब्रिक टेप की तहों के बीच पेट्रोलियम जैली उपयोग में ली जाती है। संतृप्त इंसुलेटिंग पेपर का अधिक उपयोग किया जाता है।
  2. केबल कोर ( Cable Core )- यह भाग एल्यूमीनियम या तांबे की एक या कई तारों को लपेटकर बनाया गया होता है। यह केबल का केंद्रीय भाग होता है। केबल में लपेटे जाने वाले तारों की संख्या इस तरह से रखी जाती है कि इससे लम्बाकार सेक्शन का गोल चक्कर बनता है।
  3. मैटेलिक शीथ ( Metallic Sheath )- सबसे पहले चालक के ऊपर इंसुलेशन किया जाता है उसके बाद इंसुलेशन के ऊपर एल्यूमीनियम या लेड की पतली परत चढ़ाई जाती है। यह परत बाहरी वातावरण की नमी को इंसुलेशन तक नहीं जाने देती है। इसमें धातु के रूप में शीशे का उपयोग किया जाता है और कई बार एल्युमिनियम की शीथ का उपयोग किया जाता है।
  4. बेडिंग ( Beading )- मैटेलिक शीथ के ऊपर पेपर की परत चढ़ी होती या चढ़ाई जाती है। बेडिंग से मैटेलिक शीथ को बचाया जाता है।
  5. आर्मरिंग ( Armouring )- इसके द्वारा केबल को मैकेनिक पावर ( Mechanical Power ) दी जाती है। यह स्टील टेप तारों के रूप में होती है।
  6. सर्विंग ( Searving )- आर्मरिंग के ऊपर बेडिंग की तरह एक परत चढ़ाई जाती है, जिसको सर्विंग कहते हैं।

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केबल के प्रकार | Cable ke Prakar

  1. वी.आई.आर. केबल- इसकी फुल फॉर्म वल्केनाइज्ड इंडियन रबड़ केबल है। यह सूती के धागे की बुनाई व बिटुमिन के लेप को चढ़ाकर तैयार की जाती है। इस प्रकार की केबल का उपयोग केपिंग-केसिंग, कंण्डयूट पाइप व अस्थायी प्रकार की विद्युत वायरिंग में किया जाता है।
  2. पी.वी.सी. केबल- यह केबल तांबे या एल्यूमीनियम की नंगी तार पर पीवीसी की परत चढ़ाकर तैयार की जाती है। यह केबल को वातावरण के प्रभावों से व बाहरी कुप्रभावों से बचाता है।
  3. सी.टी.एस. केबल- इसको टफ रबर शील्ड केबल कहते हैं। इस प्रकार के केबल का उपयोग नमी वाले स्थानों पर विद्युत वायरिंग करने में किया जाता है।
  4. ट्रोपोड्योर केबिल- यह पीवीसी केबल के ऊपर ‘थर्मोप्लास्टिक कम्पाउण्ड’ की परत चढ़ाकर तैयार किया जाता है। इसका उपयोग रेवले सिग्नल व पावर उपकरणों में किया जाता है।
  5. लैड शीथ्ड केबल- यह यांत्रिक रूप से सुदृढ़ है। यह टिन आलेपित तांबे के तार पर वल्केनाइज्ड इण्डियन रबर का आवरण और उसके ऊपर सीसा धातु का सुरक्षा आवरण चढ़ाकर तैयार किया जाता है। इनका उपयोग रासायनिक उद्योगों व अन्य मशीनों की वायरिंग करने में किया जाता है।
  6. वैदर-प्रुफ केबल- यह वी.आई.आर. केबल की तरह होता है। परन्तु इसमें बिटुमिन पदार्थ का लेप करने के स्थान पर इसे वातावरणीय परिवर्तन तापों ( धूप, ठण्ड व वर्षा आदि ) को सह सकने वाले द्रव पदार्थ में डुबोकर ‘वैदर-प्रूफ’ किया जाता है। इसका उपयोग घर व औद्योगिक में खुले स्थानों पर किया जाता है।
  7. आर्मर्ड केबल ( Armoured Cable )- इसको एकल स्ट्रैण्डेड तांबे के तार की पॉलीथाइलीन की अचालक परत चढ़ाकर बनाया जाता है। यह भूमिगत केबल के रूप में विद्युत सप्लाई के लिए यूज किया जाता है।
  8. फ्लैक्सिबल केबल- यह अनेक महीन तारों को समूह के रूप में इकट्ठा करके अचालक आवरण चढ़ाकर बनाई गई केबल फ्लैक्सिबल केबल कहलाती है।

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वोल्टेज ग्रेड के आधार पर केबल का वर्गीकरण | Voltage grade ke aadhaar par Cable ka vargeekaran

  1. निम्न वोल्टेज केबल- हम लोग घर में लाइट जलाने व पंखा चलाने के लिए जिस केबल का उपयोग करते हैं, वह निम्न वोल्टेज का होता है। यह 250 वोल्ट तक के वोल्टेज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकता है। यह पीवीसी, सीटीएस, वीआईआर, वैदर-प्रूफ व फ्लैक्सिबल होते हैं।
  2. मध्यम वोल्टेज केबल- 650 वोल्ट तक औद्योगिक व घर के पावर लोड के लिए बनाए गए वोल्टेज मध्यम वोल्टेज केबल कहलाते हैं। यह सीटीएस, पीवीसी, वीआईआर, लैड शीथ्ड, वैदर-प्रूफ, ट्रोपोड्योर व फ्लैक्सिबल होते हैं।
  3. उच्च वोल्टेज केबल- 22,000 वोल्ट तक विद्युत वितरण प्रणाली में उपयोग होने वाले केबल, उच्च वोल्टेज केबल कहलाते हैं। यह आर्मर्ड केबल व स्ट्रैण्डेड प्रकार के नंगे तार होते हैं।
  4. अति उच्च वोल्टेज केबल- 22,000 वोल्ट से अधिक वोल्ट पर उपयोग किए जाने वाले केबल, अति उच्च वोल्टेज कहलाते हैं। यह स्ट्रैण्डेड प्रकार के नंगे तार होते हैं और यह तांबें के बने होते हैं।

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केबल कैसे बनाई जाती है?

इसको बनाने के लिए एक या एक से अधिक तार को जोड़कर व मरोड़कर तैयार किया जाता है।

केबल का उपयोग किस लिए किया जाता है?

एक स्थान से दूसरे स्थान तक विद्युत प्रवाह को ले जाने के लिए किया जाता है।

केबल उदाहरण क्या है?

केबल की परिभाषा का अर्थ है दो चीजों को जोड़ने के लिए उपयोग किए जाने वाले तारों का रस्सी जैसा गुच्छा। आपके फ़ोन को वॉल सॉकेट से जोड़ने वाला कॉर्ड केबल का एक उदाहरण है। आपके कंप्यूटर और आपके इंटरनेट सेवा प्रदाता के बीच का कनेक्शन केबल का एक उदाहरण है।

केबल संरचना क्या है?

केबल संरचना, लंबी अवधि की संरचना का रूप जो तनाव के अधीन है और समर्थन के लिए निलंबन केबल्स का उपयोग करता है। केबल से बनी छत को ऊपर से स्टील केबल्स द्वारा समर्थित किया जाता है जो छत के स्तर से ऊपर उठने वाले मस्तूलों से नीचे की ओर निकलते हैं।

केबल कैसे काम करते हैं?

विद्युत केबल्स वर्तमान प्रवाह के लिए कम प्रतिरोध पथ प्रदान करके काम करते हैं। सबसे सरल विद्युत केबल सिर्फ एक धातु कंडक्टर हो सकता है – इन केबलों का उपयोग कंडक्टर के चारों ओर हवा के अलावा कंडक्टर के चारों ओर किसी भी इन्सुलेट सामग्री के बिना निर्मित ओवरहेड लाइन तारों के रूप में किया जाता है।

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